साय सरकार की बड़ी सौगात, 774 नई सड़कों के निर्माण के लिए 2225 करोड़ मंजूर

प्रदेश को ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के चतुर्थ चरण के अंतर्गत राज्य में 2225 करोड़ से 774 ग्रामीण सडक़ों के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत आने वाली अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों को प्राथमिकता दी गई है। योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में कुल 2427 किलोमीटर लंबाई की 774 सडक़ों का निर्माण किया जाएगा, जिससे प्रदेश की 781 ग्रामीण बसाहटें बारहमासी सडक़ सुविधा से जुड़ेंगी। इससे अब तक सडक़ संपर्क से वंचित दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा प्राप्त होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार एवं रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय विस्तार होगा।
इन जिलों के लिए मिली स्वीकृति
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पीएमजीएसवाय-4 के अंतर्गत प्रदेश के 24 जिलों में कुल 774 सडक़ों को स्वीकृति दी गई है। जिसमें सबसे अधिक बस्तर जिले में 87 सडक़ें बनाई जाएंगी। इसी तरह कोरिया में 84, जशपुर में 77, सूरजपुर में 76, बलरामपुर में 58, कोरबा में 55, कवर्धा 48, महासमुंद एवं बीजापुर में 44-44, कांकेर में 41, कोण्डागांव में 34, बिलासपुर में 27, सरगुजा में 26, सुकमा में 16, रायगढ़ में 14, दंतेवाड़ा में 12, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 09, गरियाबंद में 07, बालोद में 06, राजनांदगांव में 05, मुंगेली में 06, बेमेतरा एवं धमतरी में 02-02 को स्वीकृति प्रदान की गई है।
कृषि उपज के परिवहन में होगी सहूलियत
इन सडक़ों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा होगी, विद्यार्थियों को विद्यालयों तक पहुंच आसान होगी तथा ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। बता दें कि पीएमजीएसवाय के पूर्व चरणों में अब तक 40 हजार किलोमीटर से अधिक की 8316 सडक़ों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। साथ ही विशेष पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए विगत दो वर्ष में 600 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण कर 138 विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों को जोडऩे का कार्य किया जा चुका है।























