अब होमियोपैथी में, एआई एप्लिकेशन से हो रहा इलाज

भविष्य में होने वाली बीमारियों को रोक सकती है होमियोपैथी

रायपुर। होम्योपैथी इलाज की वो विधि है जो भविष्य में होने वाली बीमारियों को रोक सकती है। छत्तीसगढ़ में ही 2 हजार डाक्टर रजिस्टर्ड है और कोरोना के बाद अब प्रदेश में भी लोगों का रूझान होम्योपैथी की और बढ़ा है। भारत में भी होमियोपैथी पिछले कुछ दशकों में एक लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति के रूप में सामने आई है जो कि जटिल रोगों का जल्द से जल्द बिना किसी साइड इफेक्ट के रोगों को जड़ से खत्म करने में कारगर है। रायपुर होम्योपैथी कॉलेज की चिकित्सक डॉ. हर्षिता मेहता कहती हैं कि कोरोना के बाद कम उम्र के युवाओं को भी बड़ी बीमारियों जैसे,दिल का दौरा,डायबिटीज, हार्मोनल डिसऑर्डर आदि हो रहे हैं। युवाओं में बढ़ता हृदयाघात अत्यंत चिंता का विषय है। कोरोना काल के बाद ऐसे कई केस सामने आए है जिससे लोग दहशत में है।ऐसे में निसंदेह होमियोपैथी एक उम्मीद की किरण है।

होने वाली बीमारी का बचाव कांस्टीट्यूशनल मेडिसिन

डॉ. हर्षिता मेहता कहती हैं कि सबसे पहले आप अपने होमियोपैथी चिकित्सक से मिलकर अपनी समस्या और चिंता व्यक्त करें,आपका चिकित्सक पूरे डिटेल में आपका केस लेता है जिसमें वह आपके शारीरिक तकलीफें और मानसिक तनाव,आपकी जीवनशैली,आपके पारिवारिक बीमारियों की पृष्ठभूमि का अध्ययन करके यह जान सकता है, के भविष्य में आपको किस तरह के रोग हो सकते है। उसके अनुसार वह एक दवा का सिलेक्शन करता है (होमियोपैथी में इसे कांस्टीट्यूशनल मेडिसिन कहा जाता है) समय समय पर उस दवा का उपयोग करने से भविष्य में होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है।

पूरा जीवन होम्योपैथी के लिए समर्पित

कोलकाता में बीते 55 सालों से लोगों का इलाज कर रहे 78 साल के डॉ, सुरेशचंद्र देव कहते हैं कि समय के साथ ही होम्योपैथी में लोगों का विश्वास बढ़ा है । 50 साल पहले लोगों को होम्योपैथी के प्रति जागरूकता कम थी लेकिन वर्तमान में लोग होम्योपैथी को अपनाने लगे है। छत्तीसगढ़ से कई मरीज आज उनसे ऑनलाइन इलाज करवा रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका से भी लोग उनसे ऑनलाइन इलाज लेते है। डॉ. देव कहते हैं कि कोरोना के बाद होमेयोपैथी ऑनलाइन और ब्हाटएप पर होने वाला इलाज है जिसमें मरीज के लक्षणों के आधार पर दवाई दी जाती है, क्योंकि होम्योपैथी के कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

बाक्स होमियोपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनीमैन का जन्मदिन हर वर्ष 10 अप्रैल को विश्व होमियोपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन होमियोपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनीमैन का जन्मदिन होता है। डॉ हैनीमैन एक जर्मन चिकित्सक थे,जिन्होंने 18वी शताब्दी में एलोपैथी के दर्दनाक उपचार और उस उपचार से होने वाली मृत्यु से निराश होकर एक ऐसे चिकित्सा पद्धति की खोज की जो मनुष्य के शरीर और मन दोनों को ध्यान में रखकर बीमारी को जड़ से खत्म कर सकती है। उन्होंने हजारों लोगों पर दवाओं का,और बीमारी के कारणों का अध्ययन किया और पाया कि हर एक व्यक्ति की बीमारी का कारण और उसके लक्षण अलग होते है,और उस विशेष लक्षणों से मिलती हुई दवा देने पर ही उस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। तब से होमियोपैथी पूरे विश्व में अपने साधारण दवाओं से जटिल बीमारियों को समूल नष्ट करने के लिए प्रचलित हुई।

महिलाओं के लिए ज्यादा कारगर है

प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. फारुख जे मास्टर कहते हैं कि किशोरावस्था की लड़कियां और महिलाएं अक्सर गर्भनिरोधक गोलियां, एस्ट्रोजन हार्मोन की गोलियां लेती हैं। ऐसी हार्मोनल गोलियों को बंद कर देना चाहिए। सरकार को इन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। यह उनमें कार्सिनोजेनिक कोशिकाओं को ट्रिगर कर रहा है और महिलाओं में स्तन, गर्भाशय और अन्य कैंसर के मामले कई गुना बढ़ गए हैं। ऐसे मामलों में, मरीजों को होम्योपैथी उपचार अवश्य लेना चाहिए। मासिक धर्म की अनियमितताओं के मामलों में, एलोपैथी उपचार लेने के बजाय, मरीजों को पहले होम्योपैथी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

एप्लिकेशन खरीदा, मैंने अपनी लिखी हुई सभी 66 किताबें, अपना बायोडाटा, मरीजों का डेटा, निष्कर्ष उसमें डाल दिए। इलाज के दौरान, जब मुझे संदर्भों की आवश्यकता होती है। यह मुझे वह सटीक जानकारी देता है जिसकी मुझे आवश्यकता होती है और अब यह मेरे जैसे काम करता है।

वो कहते हैं कि हमारी जीवनशैली, खान-पान की आदतें और पर्यावरण सब बदल गए हैं। होम्योपैथी में हमारे पास प्रभावी दवाएं, एंटी-डोट्स हैं, लेकिन स्वस्थ रहने के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली के साथ-साथ खान-पान की आदतों में भी बदलाव लाना होगा। जंक या फास्ट फूड खाने के बजाय हमें स्वस्थ प्राकृतिक भोजन पर ध्यान देना होगा, गैजेट्स, मोबाइल फोन और कंप्यूटर का उपयोग तभी करना चाहिए जब आवश्यक हो।

होम्योपैथी के फायदे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। इसके होम्योपैथिक दवाओं के लाभ प्राकृतिक और सुरक्षित , होम्योपैथिक दवाएं प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती हैं, इसलिए इनके साइड इफेक्ट बहुत कम होते हैं। व्यक्तिगत उपचार हर मरीज के लक्षण और स्वभाव के अनुसार दवा दी जाती है, जिससे इलाज ज्यादा प्रभावी होता है। क्रॉनिक (पुरानी) बीमारियों में उपयोगी जैसे एलर्जी, अस्थमा, माइग्रेन, त्वचा रोग आदि में यह लंबे समय तक लाभ दे सकती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित इसकी दवाएं हल्की होती हैं, इसलिए हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। आसानी से लेने योग्य अधिकतर दवाएं मीठी गोलियों के रूप में होती हैं, जिन्हें लेना आसान होता है। समग्र दृष्टिकोण यह केवल बीमारी नहीं बल्कि पूरे शरीर और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर इलाज करती है। –

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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