Woman Story :एक महिला का संकल्प, 50 हजार महिलाओं के जीवन में बदलाव

जब महिलाओं ने जाना अपना हक, बदलने लगी गांवों की तस्वीर


पामगढ़ (जांजगीर-चांपा)। किसी भी समाज की असली ताकत उसकी महिलाएं होती हैं। जब महिलाएं शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनती हैं तो उसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा गांव, समाज और आने वाली पीढ़ियां बदलने लगती हैं। इसी सोच को धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड के कोहका गांव की चंद्रकुमारी लहरे।

साल 2012 से सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में सक्रिय चंद्रकुमारी आज प्रदेशभर की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने अपनी संस्था ‘अक्षर’ के माध्यम से महिला अधिकार, लैंगिक समानता, किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर व्यापक अभियान चलाया है। उनकी संस्था प्रदेश के लगभग 50 हजार महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़कर काम कर रही है।

चंद्रकुमारी का मानना है कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बल्कि बदलाव का नेतृत्वकर्ता बनाना जरूरी है। यही कारण है कि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, सरकारी योजनाओं, घरेलू हिंसा से संरक्षण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के बारे में जानकारी देती हैं।

30 गांवों में बदलाव की बुनियाद

पामगढ़ और बिलाईगढ़ क्षेत्र के 30 गांवों में उनकी 60 प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ताओं की टीम सक्रिय है। ये महिलाएं अपने-अपने गांवों में बैठकों, चौपालों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों तक जानकारी पहुंचाती हैं। सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि 30 स्कूलों और 60 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों और अभिभावकों के साथ नियमित संवाद किया जाता है। पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। चंद्रकुमारी कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी का अभाव ही महिलाओं की सबसे बड़ी चुनौती है। जब उन्हें अपने अधिकारों और अवसरों की जानकारी मिलती है तो वे खुद निर्णय लेने में सक्षम होने लगती हैं।

सीड बॉल से हरियाली, जागरूकता से नई सोच

महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ चंद्रकुमारी पर्यावरण संरक्षण को भी सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा मानती हैं। उन्होंने सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को सीड बॉल बनाना सिखाया। इसके माध्यम से खाली पड़ी जमीनों और जंगलों में पौधों का विस्तार हुआ। महिलाओं को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनकी देखभाल, संरक्षण और जैव विविधता के महत्व की भी जानकारी दी गई। इससे कई गांवों में हरियाली बढ़ी और पर्यावरण के प्रति लोगों की सोच बदली।

फैक्ट फाइल

वर्ष 2012 से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय संस्था ‘अक्षर’ के माध्यम से काम 50 हजार महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ाव 30 गांवों में जागरूकता अभियान 60 महिला कार्यकर्ता सक्रिय 30 स्कूल और 60 आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित कार्यक्रम महिला अधिकार, जेंडर समानता, स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस प्रदेश के कई जिलों में प्रशिक्षण देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य

किशोरियों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस

ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर अक्सर खुलकर चर्चा नहीं होती। चंद्रकुमारी ने इस विषय को प्राथमिकता बनाते हुए किशोरियों के लिए विशेष सत्र शुरू किए। उन्हें पोषण, एनीमिया से बचाव, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है। उनका मानना है कि स्वस्थ और शिक्षित किशोरी ही आगे चलकर सशक्त महिला बन सकती है।

आत्मविश्वास से बदली महिलाओं की पहचान

चंद्रकुमारी अपने काम की सबसे बड़ी उपलब्धि उन महिलाओं को मानती हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद समाज में अपनी पहचान बनाई। वे देवरी गांव की रेशमती टंडन का उदाहरण देती हैं, जो केवल पांचवीं तक पढ़ी हैं, लेकिन आज गांव में उनकी राय को सरपंच, पंच और ग्रामीण गंभीरता से लेते हैं। कोविड महामारी के दौरान रेशमती ने राहत और जनजागरूकता के अनेक कार्य किए। यह बदलाव शिक्षा से अधिक आत्मविश्वास और सामाजिक जागरूकता का परिणाम है।

बस्तर में अभी लंबा सफर बाकी

चंद्रकुमारी के अनुभव में बिलासपुर और जांजगीर-चांपा क्षेत्र की महिलाएं अब काफी जागरूक हो चुकी हैं, लेकिन आदिवासी अंचलों विशेषकर बस्तर में अभी भी व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला अधिकारों को लेकर लगातार संवाद और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। वे कहती हैं कि दूरस्थ गांवों की महिलाएं प्रतिभाशाली हैं, बस उन्हें अवसर और सही जानकारी देने की जरूरत है।

संदेश

“महिलाओं के भीतर असीम शक्ति होती है। जरूरत केवल आत्मविश्वास, शिक्षा और सही मार्गदर्शन की है। जिस दिन हर महिला अपने अधिकारों को जान जाएगी,उस दिन समाज की आधी नहीं, पूरी ताकत जाग जाएगी।”

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