हिंदी दिवस विशेष: 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में किसी ने नहीं चुनी MBBS की हिंदी माध्यम से पढ़ाई

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में किसी भी कॉलेज में हिंदी माध्यम में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले एक भी छात्र नहीं है। यही नहीं किसी छात्र ने हिंदी माध्यम में परीक्षा देने का विकल्प भी नहीं चुना। राज्य सरकार ने पिछले साल 14 सितंबर को सभी सरकारी कॉलेजों में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई करने की घोषणा की थी। हालांकि यह घोषणा पूरी तरह फेल हो गई है। किसी छात्र ने हिंदी को पढ़ाई का माध्यम नहीं चुना। विशेषज्ञों के अनुसार एमबीबीएस की पढ़ाई अगर हिंदी माध्यम में कर भी ली जाए, तो एमडी-एमएस में अंग्रेजी में ही पढ़ाई करनी पड़ेगी। इसलिए छात्र कंफ्यूज नहीं होना चाहते।

ग्रामीण इलाकों से आने वाले व हिंदी माध्यम में स्कूली पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को डॉक्टर बनने में आसान हो इसलिए राज्य सरकार ने हिंदी माध्यम में एमबीबीएस की पढ़ाई का निर्णय लिया था। घोषणा तो कर दी गई, लेकिन पढ़ाई का सिस्टम क्या होगा, टीचर कहां से आएंगे, इस पर कोई योजना ही नहीं बनी। यही नहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेजों को ऐसा एक भी आदेश जारी नहीं किया कि हिंदी माध्यम में एमबीबीएस की क्लास लगाई जाए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन हिंदी माध्यम में पढ़ाई को लेकर कितना गंभीर है। पत्रिका ने प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के डीन से बात कर जाना कि एमबीबीएस में हिंदी माध्यम से पढ़ाई की वास्तविक स्थिति क्या है?

लाइब्रेरी में रखवा दी कुछ किताबें

सरकार की घोषणा महज कागजी साबित हुई है। कुछ कॉलेजों की लाइब्रेरी में कुछ किताबें जरूर रखवाई गई हैं, ताकि जरूरतमंद छात्र इसका उपयोग कर सकें। हालांकि कम ही छात्र लाइब्रेरी की हिंदी किताबों की ओर झांकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हिंदी माध्यम में गिनी-चुनी किताबें उपलब्ध है। ऐसे में यह छात्रों के लिए ज्यादा कारगर नहीं है। मध्यप्रदेश की तर्ज पर राज्य सरकार ने यह घोषणा की थी। मध्यप्रदेश में भी हिंदी माध्यम की पढ़ाई का बुरा हाल है।

कॉलेज में हिंदी माध्यम में एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं हो रही है। दो से तीन छात्रों ने ही रूचि दिखाई थी इसलिए अलग क्लास नहीं लगाई।

-डॉ. विवेक चौधरी, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर

हाल ही में हुई एनुअल एग्जाम में किसी छात्र ने हिंदी माध्यम से परीक्षा नहीं दी। छात्रों को सुविधा हो इसलिए हिंदी व अंग्रेजी में पढ़ाते हैं।

-डॉ. केके सहारे, डीन मेडिकल कॉलेज कोरबा

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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