हरित विकास और ग्रामीण आजीविका की अनूठी पहल

A unique initiative for green development and rural livelihoods.

वीबी-जी रामजी के तहत एक ही स्थल पर लगे 1717 नाशपाती के पौधे

फलदार पौधों से पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

रायपुर। विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हरित विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम कोठली में एक ही स्थल पर 1717 नाशपाती के पौधों का वृहद पौधरोपण कर हरित विकास का नया अध्याय रचा गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों, विशेषकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए भविष्य में आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।

कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सामरी विधायक श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा ने पौधरोपण कर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का संकल्प है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि फलदार पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि इन पौधों के संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपी जाएगी, जिससे पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ भविष्य में फल उत्पादन के माध्यम से उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों तथा स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक पौधरोपण कर पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान ग्राम कोठली की श्रीमती प्रभावती दिवाकर ने अपनी बेटी ऋषिका रवि के नाम पर नाशपाती का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और बेटी के प्रति स्नेह का प्रेरक संदेश दिया। वहीं कक्षा 10वीं की छात्रा गायत्री पैकरा ने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार की यह पहल हरित विकास, जलवायु संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने का प्रभावी मॉडल बन रही है, जिसमें फलदार वृक्षों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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