लोकसभा में 12 घंटे की तीखी बहस के बाद वक्फ विधेयक 288/232 मतों से पास, जानिए क्या क्या बदला

नई दिल्ली. लोकसभा में करीब 12 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद बुधवार देर रात वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 और मुसलमान वक्फ (रिपील) विधेयक, 2024 को पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा पेश किए गए इन विधेयकों को 288 वोटों के समर्थन और 232 विरोधी वोटों के साथ मंजूरी मिली। अब इसे राज्यसभा में भेजा जाएगा। वक्फ अधिनियम, 1995 (2013 में संशोधित) में लगभग 40 संशोधनों का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक बनाना, कानूनी विवादों को कम करना और पारदर्शिता लाना है।
इससे पहले, लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में रात तक तीखी तकरार देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि हमने वक्फ से छेड़खानी नहीं की है। वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद के लिए संशोधन किया है। वक्फ बोर्ड को धार्मिक क्रियाकलाप नहीं करना है, बल्कि इसका कार्य प्रशासनिक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि इनको न पिछड़ों की चिंता है न मुसलमानों की। ये जातिवाद और तुष्टीकरण के आधार पर काम करते आए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के संगठन महासचिव व सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि आज आप मुस्लिम समुदाय पर हमला कर रहे हो, कल ईसाई व परसों सिख के खिलाफ होंगे। संघ परिवार का स्पष्ट एजेंडा है कि अल्पसंख्यकों को खत्म कर दो।
स्पीकर ओम बिरला ने दोपहर में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा की शुरुआत की। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक रखते हुए इसका नाम एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तीकरण, दक्षता और विकास (उम्मीद) करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये चाहते हैं कि इनके राज में जो मिलीभगत चली, वह चलती रहे।
हम तो कह रहे हैं कि ‘वक्फ’ वही कर सकता है जो इस्लामिक प्रैक्टिसिंग वाला होगा। वक्फ धार्मिक हुआ, वक्फ बोर्ड नहीं। चैरिटी कमिश्नर को ट्रस्ट नहीं चलाना है, उसको केवल ये देखरेख करना होता है कि ट्रस्ट सही ढंग से चल रहा है कि नहीं। सारे ट्रस्ट के चैरिटी कमिश्नर अलग-अलग होंगे क्या? इससे तो देश टूट जाएगा। यूपीए की तत्कालीन सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में संशोधन किया, उसके चलते आज ये संशोधन लाने की नौबत आई। कांग्रेस सरकार ने दिल्ली लुटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दी। उत्तर रेलवे की जमीन वक्फ को दे दी। हिमाचल में वक्फ की जमीन बताकर मस्जिद बनाने का काम हुआ। उन्होंने तमिलनाडु से कर्नाटक तक के उदाहरण दिए।
खरगे पर आरोपों को कार्यवाही से हटाया: भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में वक्फ की जमीनों को लेकर घोटाले हुए हैं। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हमें हमारे नेता पर गर्व है। ठाकुर ने आधारहीन आरोप लगाकर दलित खरगे का अपमान किया है। हंगामे के चलते ठाकुर के आरोपों को कार्यवाही से हटा दिया गया।
रिजिजू और गोगोई में नोकझोंक: विधेयक पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संसद भवन को भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया था। यूपीए सरकार ने इसे डिनोटिफाई भी कर दिया था। अगर देश में मोदी सरकार नहीं होती तो आज जिस जगह हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की होती। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि रिजिजू झूठ बोल रहे हैं, उनके अपनी बात का प्रमाण देना चाहिए। आज ये अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदना जता रहे हैं, जबकि इनकी डबल इंजन सरकारों ने लोगों को नमाज तक नहीं पढ़ने दिया।
डीपी और जेडीयू का दबाव का असर: वक्फ संपत्ति विवाद का सर्वे कराने का अधिकार पुराने विधेयक में जिला कलक्टर को दिया गया था, लेकिन टीडीपी और जेडीयू के दबाव में इसे बदलना पड़ा। संशोधित विधेयक में जिला कलक्टर के ऊपर के अधिकारी को यह शक्ति दी गई है। इसके अलावा यह विधेयक पुरानी वक्फ संपत्तियों पर लागू नहीं होगा। इसी तरह विधेयक में वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमियों पर कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
1केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार का एक एजेंडा है, धर्म के नाम पर भारत माता का विभाजन करना। वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्य लेकर आ रहे हैं। किसी मंदिर में मुस्लिम या ईसाई सदस्य को वोटिंग का हक नहीं है। सरकार संसद में एंग्लो इंडियन के प्रतिनिधित्व खत्म किया।
2अखिलेश यादव: सपा प्रमुख ने कहा कि रेलवे की जमीन, डिफेंस की जमीन भी भारत की है। क्या डिफेंस व रेलवे की जमीन नहीं बेची जा रही है? वक्फ मुसलमानों का है और विधेयक पर उन्हीं की बात नहीं सुनी जा रही है। करोड़ों लोग खिलाफ हैं तो इसे लाने की जरूरत क्या है।
3कल्याण बनर्जी: टीएमसी संसदीय दल के नेता ने कहा कि ये संविधान के खिलाफ है, संवैधानिक ढांचे पर प्रहार है। वक्फ संपत्ति मुस्लिम समुदाय के लिए बैकबोन है। यह इस्लामिक परंपराओं को लेकर गंभीर चिंता का विषय हैं। किसी भी धर्म में दिए जाने वाले दान को कैसे नियंत्रण कर सकते हैं।
4ए राजा: डीएमके सांसद ने कहा कि ये कहानी गढ़ी जा रही है कि संसद भवन वक्फ बोर्ड को दे दी गई होती। आज का दिन इस संसद के लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण है कि सेक्यूलर देश आखिर किस तरफ जाएगा। वक्फ राजनीतिक बिल इस सदन के माध्यम से पूरे देश के लोगों पर थोपा जा रहा है।
1अमित शाह: गृहमंत्री ने कहा कि मुस्लिमों को विश्वास दिलाते हैं कि वक्फ में कोई गैर मुस्लिम नहीं आएगा, लेकिन वक्फ बोर्ड में जो संपत्तियां बेच खाने वाले, सौ-सौ साल के लिए औने-पौने दाम पर किराए पर देने वाले लोग हैं, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद उन्हें पकड़ने का काम करेगा।
2ललन सिंह: जद (यु) सांसद व पंचायती राज मंत्री ने कहा कि यह विधेयक मुसलमान विरोधी नहीं है। हम वक्फ की आमदनी सही मायने में मुसलमानों के लिए खर्च हो, इस पर नजर रखने के लिए बिल में संशोधन लेकर आए हैं। यह विधेयक पसमांदा मुसलमान, निचले तबके और निम्न वर्ग के मुसलमानों को अधिकार मिलेंगे।
3कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी: टीडीपी के सांसद ने कहा कि वक्फ संपत्ति को मुस्लिमों के हर वर्ग विशेष रूप से युवाओं व महिलाओं के कल्याण में लगाया जाना चाहिए। वक्फ के पास 1.2 लाख करोड़ की संपत्ति व लाखों एकड़ जमीन है। इससे आर्थिक व सामाजिक बदलाव में मदद मिल सकती है।
4अरुण भारती: एलजेपी (रामविलास) सांसद ने कहा कि विधेयक पर विपक्ष केवल धार्मिक पक्ष को लेकर विरोध दर्ज कराता रहा है, जबकि इसके सामाजिक और आर्थिक पक्ष पर बहस नहीं हो पाती। ऐसा इसलिए क्योंकि धार्मिक पक्ष पर विपक्ष मुस्लिम समाज को भड़का कर अपना वोट बैंक बनाए रखना चाहता है।
कानून में संशोधन क्यों और क्या-क्या बदला
पहले किसी भी धर्म का व्यक्ति वक्फ को संपत्ति दान कर सकता था।
अब केवल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम (कम से कम पांच साल से) ही अपनी संपत्ति वक्फ को दे सकता हैं, जो 2013 से पहले के प्रावधान को बहाल करता है।
पहले वक्फ कानून के धारा- 40 के तहत बोर्ड मनमाने ढंग से संपत्ति पर दावा कर सकता था।
अब संशोधित विधेयक धारा- 40 को हटाता है, जिससे वक्फ बोर्ड की मनमानी पर रोक लगेगी।
पहले वक्फ की संपत्तियों पर 58 हजार से अधिक अतिक्रमण के मामले चल रहे हैं।
अब केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल वक्फ संपत्तियों को ट्रैक करेगा, जिससे बेहतर पहचान, निगरानी और प्रबंधन सुनिश्चित होगा। वक्फ बोर्डों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
पहले वक्फ संपत्तियों का धार्मिक और सामाजिक कल्याण की जरूरतों को पूरा करने का प्रावधान, लेकिन कुप्रबंधन के चलते ऐसा नहीं होता था।
अब ऑडिटिंग और अकाउंटिंग उपायों से वित्तीय कुप्रबंधन पर अंकुश लगेगा। इससे मिलने वाले फंड का इस्तेमाल वंचितों के स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा व आवास के लिए हो सकेगा।
यह लाभ भी होंगे
स्कूलों और मदरसों का निर्माण व रखरखाव।
महिलाओं की भागीदारी, पारदर्शिता सुनिश्चित।
मुस्लिम लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति।
महिला उद्यमियों के लिए कौशल विकास और माइक्रो फाइनेंस सहायता।
फैशन डिजाइन, स्वास्थ्य सेवा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण।
उत्तराधिकार विवादों और घरेलू हिंसा मामलों के लिए कानूनी सहायता केंद्रों की स्थापना।
विधवाओं के लिए पेंशन योजनाएं।