सावधान…स्कूली बच्चों को शिकार बना रहा ‘साइलेंट किलर’

नई दिल्ली. कभी सिर्फ बड़ों की बीमारी समझा जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब बच्चों में भी दस्तक दे रहा है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि भारतीय स्कूलों में 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों में हाइपरटेंशन के मामले तेजी से बढ़े हैं।

मध्य भारत के एक अध्ययन में 1.4% किशोरों में उच्च रक्तचाप पाया गया, जबकि महाराष्ट्र के 10 स्कूलों में 2600 से ज्यादा बच्चों पर हुए सर्वे में यह आंकड़ा 7.5% तक पहुंच गया। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति केवल मोटे या अधिक वजन वाले बच्चों तक सीमित नहीं है, सामान्य वजन वाले लगभग 5% बच्चों में भी ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ पाया गया है। अक्सर बच्चों में हाइपरटेंशन के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए यह बीमारी ’साइलेंट किलर’ बनकर धीरे-धीरे हृदय और गुर्दों को प्रभावित करती है। अध्ययनों से पता चला है कि 40% हाइपरटेंसिव बच्चों में दिल की संरचना में शुरुआती बदलाव दिखने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ती निष्क्रियता, स्क्रीन टाइम, तनाव, नींद की कमी और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं। अधिक नमक, तले हुए और प्रोसेस्ड फूड बच्चों के ब्लड प्रेशर को असामान्य स्तर तक बढ़ा रहे हैं। स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जांच में बीपी मापना अनिवार्य होना चाहिए। समय रहते पहचान और सुधार बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
Back to top button