cg woman news: अनपढ़ औरत क्या सिखाएगी, लोग देते थे ताना
धैर्य, मेहनत और सेवा भाव यह तीन गुण बदलाव की शुरूआत करते है।
रायपुर। कबीरधाम के बोड़ला ब्लॉक के मांदिभाटा गांव की रहने वाली बैगा समुदाय से आने वाली मटिया बाई जो कभी स्कूल नहीं गई लेकिन धैर्य, मेहनत और सेवा भाव से मटिया ने अपने गांव के लोगों का जीवन बदल दिया और एक-एक घर जाकर विश्वास की नींव को मजबूत किया। उनका जीवन एक आदिवासी महिला के पारंपरिक संघर्षों का उदाहरण है। शिक्षा से वंचित, सीमित संसाधनों में घरेलू कार्य, बच्चों की परवरिश और खेत-खलिहान के कामों में व्यस्त रहने वाली मटिया बाई ने कभी सोचा नहीं था कि वे एक दिन अपने गांव में की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की प्रेरक बन जाएगी।
जिस गांव के लोग सरकारी इलाज का बहिष्कार करते थे इसी गांव की मटिया बाई ने स्वास्थ्य कार्यकर्ता का प्रशिक्षण लिया। शुरू में गांव में उनका मजाक भी उड़ाया गया एक अनपढ़ औरत क्या सिखाएगी? लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिखर युवा मंच द्वारा गांव में चलाई जा रही मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा से जुड़ गई। मटिया बाई ने इस सेवा को गांव के लिए एक वरदान के रूप में अपनाया। शिखर युवा मंच की मोबाइल मेडिकल सेवा से गांव में डॉक्टर, दवाएं और लैब टेस्ट होने लगे इससे लोगों को समय पर इलाज और दवाए मिलने लगी।
मुख्य बिंदु:
कबीरधाम के बोड़ला ब्लॉक के मांदिभाटा गांव की है मटिया बाई
बैगा समुदाय के लोग इलाज पर भरोसा करने लगे।
एक-एक घर जाकर विश्वास की नींव को मजबूत किया।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की प्रेरक बनी।
शिखर युवा मंच द्वारा गांव में चलाई जा रही मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा।
लोगों में समझ बनाई
मटिया बाई कहती हैं कि पहले मैं खुद भी झाड़-फूंक करवाती थी। अब मैं समझ गई हूं कि डॉक्टर और दवा ही सच्चा इलाज है। अब गांव की हर बहन और मां को यह समझाना ही मेरा काम है और सेवा ही मेरा धर्म है। लोगों को दवाइयों पर भरोसा नहीं था, और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से दूरी बनी रहती थी, लेकिन मटिया ने सभी की सोच को बदला।
अंधविश्वास से बाहर निकाला
बैगा समुदाय में अंधविश्वास बहुत अधिक है वे बीमारी को देव दोष मानकर झाड़-फूंक करके ही उसके इलाज पर विश्वास करते थे, लेकिन मटिया ने लोगों की इस सोच को अपनी सेवा भावना से बदला। अब गांव की सिथिति ऐसी हो गई है कि लोग खुद ही बीमार पड़ने पर मटिया से दवा की मांग करते है।

बन गई सभी की प्रेरणा
मटिया बाई आज एक प्रेरणा, एक सामुदायिक लीडर, और स्वास्थ्य क्रांति की वाहक बन चुकी हैं। उनकी निःस्वार्थ सेवा और समुदाय के लिए समर्पण यह साबित करता है कि जब सही समर्थन और सही इरादा मिल जाए तो एक अनपढ़ आदिवासी महिला भी पूरे गांव की दिशा बदल सकती है। यह कहानी बताती है कि एक महिला की जागरूकता और सेवा भावना कैसे एक पूरे समुदाय को स्वास्थ्य, विश्वास और सम्मान की ओर ले जाती है।











