नारी शक्ति: औरों की जिंदगी में भी भर रहीं रचनात्मकता के रंग

अंकिता अग्रवाल को बचपन से ही आर्ट में रुचि थी। इसलिए जब भी वक्त मिलता वह पेंटिंग्स किया करती थीं। कॉलेज पहुंचने तक यह शौक ही था लेकिन तब मुंबई से इंटीरियर डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन कर रही थीं तो शौक पैशन बन चुका था। लिहाजा उन्होंने आर्ट में ही कॅरियर बनाने की ठान ली और पैशन को प्रोफेशन में बदल दिया। अब तक वे देश के विभिन्न शहरों में ट्रेनिंग दे चुकी हैं।

अंकिता ने बताया कि लोट्स पिछवाई को वुडन फ्रेम में उकेरकर एक खूबसूरत आर्ट फॉर्म तैयार करती हूं। मेरी ट्रेनिंग एक ही दिन की होती है। मेरा फोकस वे महिलाएं होती हैं जो गृहस्थी के चलते कोई रचनात्मक कार्य नहीं कर पाती हैं। यह आर्ट कलरफुल तो रहता है, जिंदगी में भी रंग भर देता है। इस काम में खुद को तनावमुक्त भी महसूस करती हूं। उसके अलावा अन्य महिलाओं को इस तरह के रचनात्मक कार्यों से जोड़ने भी मुझे आत्मसंतुष्टि प्रदान करता है।

अंकिता ने देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रेनिंग दी है। एक समय आया जब वे मां की भी टीचर बन गईं थीं। अंकिता कहती हैं मैंने कभी सोचा नहीं था कि इस लायक बनूंगी कि उनको कुछ सिखाऊं। मां को जब मैंने सिखाया तो उन्होंने 35 साल पहले के दौर को याद करते हुए मुझसे कहा था कि जो चीज बरसों पहले छूटी वह फिर से मिल गई।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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