महिलाओं के खातों में ‘डायरेक्ट कैश ट्रांसफर’ योजनाओं से बिगड़ सकता है राज्यों का बजट

नई दिल्ली. महिलाओं के हाथ में सीधा पैसा पहुंचाना सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन एक रिपोर्ट का दावा है कि वित्तीय अनुशासन नहीं रखा गया तो यह ‘वेलफेयर वेव’ कई राज्यों के बजट को असंतुलित कर सकती है। थिंक टैंक पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में 12 राज्य महिलाओं को बिना शर्त कैश ट्रांसफर (यूसीटी) योजनाओं पर 1.68 लाख करोड़ रुपए खर्च करेंगे, 3 साल पहले ऐसी योजनाएं सिर्फ दो राज्यों में थीं।
इन 12 में से 6 राज्यों ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व घाटा अनुमानित किया है। हालांकि, यूसीटी स्कीम पर खर्च को छोड़कर इन राज्यों के वित्तीय संकेतकों में सुधार दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी स्कीम पर खर्च को हटाया या घटाया जाए तो कुछ राज्यों की वित्तीय स्थिति सुधर सकती है। जैसे कर्नाटक का घाटा 0.6% से घटकर 0.3% अधिशेष में और मध्य प्रदेश का अधिशेष 0.4% से बढ़कर 1.1% हो जाएगा।

कमजोर वर्गों को लक्षित हैं योजनाएं
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लक्षित करने वाली इन योजनाओं में तमिलनाडु की कलैग्नार मगालीर उरीमाई थोगाई थिट्टम, मध्यप्रदेश की लाडली बहना व कर्नाटक की गृह लक्ष्मी जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पात्र परिवारों की महिलाओं को 1,000 से 1,500 रुपए तक की मासिक सहायता दी जाती है।











