विद्यार्थियों की सोच का कमाल… मिट्टी के कुल्हड़ से बनाया इको फ्रेंडली कूलर

उम्र छोटी हो या साधन सीमित, सोच और जज्बा बड़ा होना चाहिए। दिल्ली के 6 बच्चों ने साबित किया कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि कल्पनाशक्ति और मेहनत की जरूरत होती है। इन बच्चों ने मिट्टी के कुल्हड़ और कबाड़ से ऐसे इको फ्रेंडली कूलर तैयार किए, जिनमें बिजली की खपत कम होती है। इन बच्चों की टीम लीडर अमायरा बताती हैं कि गर्मियों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है।

हम निजी स्कूलों में एसीयुक्त कमरों में पढ़ते हैं, वहां भी गर्मी से परेशान हो जाते हैं। ऐसे में एक पंखे में पढ़ाई करने वाले बच्चों की स्थिति क्या होती होगी। इस बात ने हमें परेशान किया और हम सभी दोस्त आस-पास के क्षेत्र की सरकारी स्कूलों में गए। जहां बच्चे एक पंखे में पढ़ने के लिए मजबूर थे। यहां कई बार तो गर्मी के कारण स्कूल में बच्चों की संख्या भी कम हो जाती है।

यूं मिला सामान

अमायरा कहती हैं कि हमने इसका समाधान खोजते हुए पारंपरिक तरीके से कूलर बनाने की सोची। इसके लिए चाय की दुकानों से मिट्टी के कुल्हड़, कबाड़ी से बिजली की डोरियां एकत्रित की। इन चीजों को मिलाकर लकड़ी की फ्रेमिंग बनाकर वैज्ञानिक तरीके से इको फ्रेंडली कूलर तैयार किया। इसके बाद बच्चों ने स्कूल प्रशासन से अनुमति ली और प्रयोग के तौर पर छह इको फ्रेंडली कूलर लगाए। इनसे सरकारी स्कूलों के चार सौ से अधिक बच्चे राहत पाकर पढ़ाई कर रहे हैं।

कैसे काम करता है कूलर

वह बताती हैं, ‘यह इको फ्रेंडली कूलर वाष्पीकरण प्रक्रिया पर आधारित है। कुल्हड़ों पर पाइप के सहारे पानी गिराया जाता है। ये कुल्हड पानी सोखते हैं और गर्म हवा उनसे टकराकर नमी वाष्पित करती है, जिससे ठंडी हवा बाहर निकलती है।’

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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