एक हजार महिलाओं को वापस काम से जोड़ा, जानें पुणे की पूजा बांगड़ के बारे में

पुणे की पूजा बांगड़ महिलाओं को तकनीकी उद्योग में समान अवसर दिलाने का प्रयास कर रही हैं। 6 वर्ष पहले शुरू की गई उनकी इस मुहिम से एक हजार से अधिक महिलाएं ब्रेक के बाद फिर से काम शुरू कर चुकी हैं। पूजा बताती हैं कि पारिवारिक जिमेदारियों, विवाह और मां बनने के बाद महिलाएं अपने कार्यक्षेत्र से कुछ समय का ब्रेक लेती हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें काम पर लौटने में काफी परेशानी होती है। यह समस्या उन्होंने बचपन से अपने आस-पास के माहौल में देखी थी। वह बताती हैं इस पर काम करना आसान नहीं था। सबसे पहले तो उन्होंने स्वयं के घर में ही समान अवसर का विरोध देखा। इसके बाद संबंधित कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं होती थीं।

कार्यशालाओं से समझाइश

वह बताती हैं कि काउंसलिंग में जाना कि अधिकांश महिलाएं दोबारा नौकरी करने के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पातीं और कर भी लेती हैं तो कार्यक्षेत्र में उन्हें कम आंका जाता है। इस समस्या के हल के लिए उन्होंने कंपनियों में कार्यशालाएं आयोजित करनी शुरू कीं, जिनमें महिलाओं को अधिक से अधिक मौका देने और उनकी कार्यक्षमताओं को प्रोत्साहित करने की समझाइश की गई।

सहकर्मी के साथ की शुरुआत

वह बताती हैं कि कंप्यूटर साइंस में डिग्री करने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने के दौरान एक साथी महिला कर्मी के साथ देखा कि किस तरह से बराबरी का काम करने के बावजूद भी उसे साथी पुरुष के समान वेतन और पद नहीं मिला रहा, इस बात ने उन्हें एक मकसद दिया और नौकरी छोड़कर महिलाओं की निशुल्क काउंसलिंग शुरू की। इसके बाद उन्होंने एक प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसके माध्यम से वह महिलाओं को नौकरी के अवसर मुहैया करवाती हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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