कच्चे घर से पक्के आशियाने तक, बालमचंद की बदली जिंदगी
From a mud house to a concrete home—Balamchand's life transformed.

रायपुर । इच्छाएं वर्षों से दबी हुई हो और परिस्थितियों के कारण उसे पूरा कर पाना असंभव हो। ऐसे कठिन समय मे उस इच्छा की पूर्ति हो जाने से जो खुशियां मिलती हैं। उसे शब्दों में कहना कठिन है। ठीक ऐसी ही कहानी है ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाले 70 वर्षीय बैगा बालमचंद की, जिन्होने लंबे जीवन मे अपने लिए एक पक्के मकान का सपना देखा और वह सपना प्रधानमंत्री जनमन आवास ने पूरा कर दिया। इस खुषी की चमक अब बालमचंद की आंखों में साफ दिखाई देती है। एक आवास ने बैगा समुदाय से आने वाले बालम के जीवन के आखिरी पड़ाव को खुषियों से भर दिया है।
कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत का दूरस्थ ग्राम पंचायत गेजी एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां के बैगा परिवार के मुखिया बालम के लिए कच्चा मकान ही जीवन का अंग था। वह जब से जानने लायक हुए उनके लिए हर बारिश और ठंड का मौसम परेशानी लेकर ही आता था। केवल मजदूरी से अपना जीवन यापन करने वाले इस आदिवासी परिवार के लिए कच्चे मकान से आगे कोई सोच नहीं सकता था। ऐसे में प्रधानमंत्री जनमन आवास ने इनकी वर्षों पुरानी सोच को आकार दे दिया है।
कच्चे घर में अपने पत्नी के साथ रहने वाले बालम के बच्चे बड़े होने के बाद उनसे अलग परिवारों के तौर पर रहने लगे। अवस्था बढ़ने के साथ उनके लिए पक्के मकान का सपना केवल सपना ही रहने वाला था। इसी संघर्षपूर्ण जीवन मात्र एक एकड़ खेतों में परंपरागत वर्षा आधारित फसल से थोड़ा सा अनाज पाने वाले बालम के लिए रोजी-रोटी का संघर्ष ही कठिन था। ऐसे में प्रधानमत्री जनमन आवास योजना से मिले पक्के मकान ने इस आदिवासी परिवार की जीवनषैली में बड़ा बदलाव ला दिया है।
जनमन आवास ने पूरा किया सपना
ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाले बैगा परिवार के मुखिया बालम ने कहा कि यह पक्का मकान उनके लिए सपनों के सच होने जैसा है। जनमन आवास बन जाने के बाद अपनी पत्नी के साथ पक्के आवास के लिए देष के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए उन्होने कहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव में उनका सपना सच हो गया हैै। वृद्धावस्था पेंशन, उज्जवला योजना के तहत सुरक्षित ईंधन और महतारी वंदन से मिल रहे आर्थिक लाभ से यह परिवार अब निश्चिंतता से जीवन यापन कर रहा है।











