हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति रजनी दुबे की प्रेरणादायक कहानी, बोलीं- क्लर्क की नौकरी के लिए भरा था फॉर्म, लेकिन..

टी. हुसैन. जीवन में असफलताएं कई बार रास्ता बदल देती हैं, लेकिन वही असफलताएं अगर हिम्मत में बदल जाएं तो सफलता की नई कहानी भी लिख देती हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रजनी दुबे की। कुछ महीने पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था, मैंने कभी क्लर्क की नौकरी के लिए फॉर्म भरा था, लेकिन वह रिजेक्ट हो गया। उस समय लगा कि शायद किस्मत कुछ और चाहती है। मैंने हार नहीं मानी, कानून की पढ़ाई की, सिविल जज बनी और आज न्यायमूर्ति के रूप में आपके सामने खड़ी हूं। जो कुछ होता है, वह भगवान की इच्छा से ही होता है।

जीवन में धैर्य जरूरी

उन्होंने युवाओं को जीवन में धैर्य और संघर्ष का महत्व समझाते हुए कहा था कि जीवन समुद्र की तरह होता है, जिसमें आगे बढऩे के लिए मोटी चमड़ी बनानी पड़ती है। छोटी-छोटी बातों से घबराने या टूटने की जरूरत नहीं है। आजकल ‘नर्वस ब्रेकडाउन’ जैसे शब्द आम हो गए हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। असफलताओं से डरने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढऩा चाहिए।

न्यायमूर्ति रजनी दुबे

न्यायमूर्ति रजनी दुबे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की एक वरिष्ठ न्यायाधीश हैं, जिन्होंने 18 जून 2018 को पदभार ग्रहण किया और 11 मई 2020 को स्थायी न्यायाधीश बनीं। जबलपुर में जन्मीं न्यायमूर्ति दुबे ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में निचली न्यायपालिका में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और वे फैमिली कोर्ट व CBI की विशेष न्यायाधीश भी रही हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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