सेहत: आपके खानपान से तय होती बच्चों की पसंद

अक्सर देखा जाता है कि बच्चे खाने-पीने में बहुत नखरे करते हैं। खासकर सब्जियां खाने से बचते हैं। हाल में हुए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट किया है कि बच्चों की खाने की पसंद सिर्फ उनके स्वाद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस पर भी असर पड़ता है कि उनके आसपास लोग किस तरह भोजन कर रहे हैं यानी सोशल मॉडलिंग बच्चों की खानपान की आदतों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

क्या कहता है शोध

यह शोध एस्टोन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ साइकोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया है। इसमें वयस्क प्रतिभागियों को कच्ची ब्रोकली खाते हुए दिखाया गया। उनके चेहरे के भाव जानबूझकर अलग-अलग रखे गए, कभी सकारात्मक, कभी नकारात्मक। इसके बाद बच्चों और प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया दर्ज की गई। जब किसी ने सब्जी खाते समय नापसंदगी दिखाई, तो देखने वालों की सब्जी खाने की इच्छा और भी कम हो गई। वहीं सकारात्मक चेहरे के भावों से सब्जियों की पसंदगी उतनी नहीं बढ़ी। यानी नकारात्मक प्रभाव का असर ज्यादा तीव्र था।

विकासवाद से जुड़ा सिद्धांत

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रवृत्ति विकासवाद से जुड़ी है। इंसान प्राचीन काल से ही दूसरों का हावभाव देखकर भोजन के सुरक्षित या हानिकारक होने का अनुमान लगाता रहा है। खासकर घृणा जैसी अभिव्यक्ति हमें संभावित हानिकारक भोजन से बचने में मदद करती थी।

माता-पिता रखें ध्यान

इस शोध का सीधा असर परिवार और स्कूल के वातावरण पर पड़ सकता है। यदि माता-पिता बच्चों के सामने सब्जियों को नापसंदगी के साथ खाते हैं या टालते हैं, तो यह व्यवहार अनजाने में बच्चों तक पहुंच जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि बच्चे पहले से ही मौजूद अपनी भोजन नापसंद को और मजबूत कर लेते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि बच्चों की खाने की आदतें सिर्फ स्वाद या पोषण पर आधारित नहीं होतीं। दूसरों की प्रतिक्रियाएं, विशेषकर नकारात्मक चेहरे के भाव, बच्चों पर गहरा असर डालते हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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