दुख:द नहीं रहे, हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे

हृदय गति रुकने की आशंका

Padma Shri Dr. Surendra Dubey passed away: प्रसिद्ध कवि, व्यंग्यकार और आयुर्वेदाचार्य पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का बीमारी के चलते निधन हो गया। जानकारी के अनुसार डॉ. सुरेन्द्र दुबे का उपचार अ‍ंबेडकर अस्पताल के एसीआई यूनिट में लंबे समय से चल रहा था। हृदय गति रूकने के कारण आज दोपहर उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद सूचना की जानकारी उनके परिवार के निकटजनों ने सोशल मीडिया के जरिए दी। इधर निधन की खबर मिलते ही साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

Surendra Dubey passed away: कई पुरस्कार से सम्मानित पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक, दुबे का जन्म 8 अगस्त 1953 को बेमेतरा, दुर्ग में हुआ था। उन्होंने हास्य सहित अनेक विषयों पर कई पुस्तकें लिखी हैं। उनके लेखन के लिए काका हाथरसी से हास्य रत्न पुरस्कार के अलावा राज्य और केंद्र सरकार से समय-समय पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया हैं, जिसमें प्रमुख है भारत सरकार द्वारा साल 2010 में सर्वोच्च नागरिकता सम्मान पद्म श्री सम्मान।

साहित्यिक योगदान की विरासत डा. दुबे ने अपनी कविताओं के माध्यम से बताया कि कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समय का दस्तावेज़ भी होती है। उन्होंने अपने व्यंग्य और हास्य से सामाजिक विसंगतियों, राजनीतिक हलचलों और मानवीय संवेदनाओं को छुआ।

उन्होंने हमें सिखाया कि हंसी सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सामाजिक विसंगतियों और राजनीतिक दांव-पेंच पर गहरा कटाक्ष भी करती है।हास्य-व्यंग्य का अनूठा तेवरहास्य और व्यंग्य की विधा को साहित्यिक जगत में अकसर हल्के में लिया जाता है, लेकिन डॉ. दुबे जैसे कवियों ने इसे गंभीर साहित्यिक विधा बना दिया। उनकी कविताएं न केवल हंसाती थी बल्कि भीतर झांकने का मौका भी देती थीं। मंच पर उनका आत्मविश्वास, प्रस्तुति की शैली और चुनी हुई शब्दावली श्रोताओं को बाँध लेती थी।

वे कई राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों का हिस्सा रहे, दूरदर्शन व अन्य चैनलों पर भी उन्होंने अपनी उपस्थिति से कविताओं को घर-घर पहुं चाया।

हास्य कविता के माध्यम से गंभीर बात कहने की जो कला उन्होंने विकसित की, वह उन्हें समकालीन कवियों से अलग करती है।कवियों की दुनिया को एक शून्यउनका निधन केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि कविता मंचों की गूंज को एक ठहराव देने जैसा है।

वह आवाज़, जो मंच पर आते ही तालियों से स्वागत पाती थी, अब सदा के लिए मौन हो गई है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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