भारत बनेगा पूरी तरह स्वदेशी मोबाइल हब, डेटा होगा सुरक्षित

नई दिल्ली. अगले दो साल में देश में मोबाइल फोन के लगभग सभी कल-पुर्जे (डिस्प्ले, बैटरी, चिपसेट और अन्य अहम हिस्से) भारत में ही बनने लगेंगे। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2027 तक भारत मोबाइल निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए।
सरकार इसके लिए 200 करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा को भी शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है। मंत्रालय के अनुसार सीसीटीवी कैमरा, बायोमीट्रिक सिस्टम और अन्य स्मार्ट डिवाइस में लगने वाली चिप भी देश में विकसित की जाएगी, ताकि विदेशों पर निर्भरता खत्म हो सके। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द ही मोबाइल कंपनियों को नए फोन में नेविगेशन और डेटा से जुड़े स्वदेशी ऐप पहले से इंस्टॉल करने के निर्देश दे सकती है। इसका मकसद है कि लोग मेक इन इंडिया और डिजिटल आत्मनिर्भरता का लाभ लोगों को मिल सके।

गौरतलब है कि देश में मोबाइल निर्माण का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2014-15 में जहां मोबाइल उत्पादन का आंकड़ा 18,000 करोड़ रुपए का था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है।
अब लगभग 85% भारतीय परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है। इस विस्तार के साथ सरकार चाहती है कि अगली छलांग पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हो। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हम सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि नवाचार और निर्माण दोनों में आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।











