IPS अधिकारी सिमाला प्रसाद की फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ आज रिलीज, जानिए सेवा में रहते हुए अफसर कैसे कर सकते हैं फिल्मों में काम

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Bhopal. मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद अभिनीत क्राइम-थ्रिलर फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ आज देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। महिला सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सिमाला प्रसाद इस फिल्म में एक महिला पुलिस अफसर की मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
फिल्म की रिलीज के साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या सेवा में रहते हुए कोई आईपीएस अधिकारी फिल्मों में अभिनय कर सकता है और इसके लिए क्या नियम हैं।
कहानी:
जब एक आदिवासी महिला की बेटी के अपहरण की धमकी दी जाती है, तो वह एक साहसी महिला पुलिस अधिकारी के साथ मिलकर मानव तस्करी के बड़े गिरोह के खिलाफ लड़ाई छेड़ती है।
फिल्म की कहानी लापता लड़कियों के मामलों, ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क, भ्रष्टाचार और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर आधारित है।
इसमें सिमाला प्रसाद ने नर्मदा रायकवार नामक पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया है, जो एक जटिल आपराधिक मामले की जांच करती है। जांच के दौरान अपराध और सत्ता के गठजोड़ से जुड़े कई रहस्य सामने आते हैं।
आदिवासी महिला के संघर्ष को भी दिखाती है फिल्म
फिल्म का एक महत्वपूर्ण पक्ष आदिवासी समाज से जुड़ा है। कहानी में एक आदिवासी महिला और उसकी बेटी के संघर्ष को दर्शाया गया है।
अपराधियों द्वारा बेटी को निशाना बनाए जाने के बाद महिला डरने के बजाय उनका मुकाबला करती है। आगे चलकर उसकी लड़ाई और महिला पुलिस अधिकारी की जांच एक-दूसरे से जुड़ जाती है।
निर्माताओं के अनुसार फिल्म वास्तविक घटनाओं और पुलिस अनुभवों से प्रेरित है, लेकिन यह किसी एक मामले की प्रत्यक्ष कहानी नहीं है।
क्या सेवा में रहते हुए IPS अधिकारी फिल्मों में काम कर सकते हैं?
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित सभी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम लागू होते हैं। इन नियमों के तहत कोई भी अधिकारी सेवा के दौरान किसी
व्यावसायिक गतिविधि, विज्ञापन, मनोरंजन उद्योग या अन्य बाहरी कार्य में सीधे तौर पर शामिल नहीं हो सकता, जब तक कि उसे सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति न मिल जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार—
—-किसी फिल्म, टीवी कार्यक्रम या अन्य रचनात्मक परियोजना में भाग लेने के लिए अधिकारी को विभागीय अनुमति लेनी होती है।
—यह सुनिश्चित किया जाता है कि गतिविधि से सरकारी दायित्वों, निष्पक्षता या सेवा की गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
—यदि परियोजना से आर्थिक लाभ जुड़ा हो तो उसके लिए भी नियमों के अनुसार स्वीकृति आवश्यक होती है।
—सरकार यह भी देखती है कि संबंधित गतिविधि अधिकारी के आधिकारिक कार्यों के साथ हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा न करे।
—इसी प्रक्रिया के तहत आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद कुछ अधिकारी साहित्य, कला, खेल और फिल्म जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखाते रहे हैं।
पहली कोशिश में UPSC, फिर फिल्मों तक का सफर
सिमाला प्रसाद का नाम उन चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों में शामिल है जिन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ कला और अभिनय के क्षेत्र में भी पहचान बनाई है।
उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इससे पहले वे ‘अलिफ’ और ‘नक्काश’ जैसी फिल्मों में भी अभिनय कर चुकी हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं।
फिल्म में ये कलाकार भी आएंगे नजर
‘द नर्मदा स्टोरी’ में सिमाला प्रसाद के अलावा रघुवीर यादव, मुकेश तिवारी, जरीना वहाब, अंजलि वर्मा और मध्य प्रदेश के कई स्थानीय कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
रेटिंग: 4.2/5
रिव्यू:
क्राइम ड्रामा आजकल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की सबसे लोकप्रिय विधाओं में से एक है, लेकिन लेखक-निर्देशक जैघम इमाम ने अपनी नई फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ के जरिए इस शैली को ग्रामीण भारत की जमीनी हकीकत से जोड़ने की कोशिश की है।
फिल्म मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम क्षेत्र की पृष्ठभूमि में बुनी गई है, जहां एक आदिवासी महिला अग्नि (अश्विनी कलसेकर) संगठित अपराध के जाल में फंस जाती है।
सिस्टम से निराश होने के बाद अग्नि को एक अप्रत्याशित साथी मिलता है—सब इंस्पेक्टर नर्मदा रायकवार (सिमाला प्रसाद)। नर्मदा अपने बीमार पिता नंदकिशोर (रघुवीर यादव) और अपनी विद्रोही मां सुधा (जरीना वहाब) की यादों के बीच संघर्ष करती दिखाई देती है।
कहानी के केंद्र में पुलिस इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम भदौरिया (शरद सिंह) की रहस्यमयी गुमशुदगी और मानव तस्करी के नेटवर्क का खुलासा है, जिसे किन्नर सरगना निशा (इश्तियाक खान) और उसकी गुरु मां संचालित करते हैं।
फिल्म की कहानी सरल है, लेकिन इसका सामाजिक संदेश बेहद प्रभावशाली है। यह दिखाती है कि किस तरह ग्रामीण भारत में हत्या और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध स्थानीय दबंगों और भ्रष्ट तंत्र के संरक्षण में पनपते हैं।
फिल्म का सबसे बड़ा पक्ष इसकी यथार्थवादी प्रस्तुति और मध्य प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति का सजीव चित्रण है।
अभिनय है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म में अधिकांश कलाकार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से जुड़े रहे हैं और इसका लाभ पर्दे पर साफ दिखाई देता है। सीमित परतों वाली कहानी को कलाकारों ने अपने अभिनय से मजबूती प्रदान की है।
अश्विनी कलसेकर एक ऐसी आदिवासी मां के किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं जो अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।
वहीं, वास्तविक जीवन में आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद ने नर्मदा के किरदार को बेहद संयमित और विश्वसनीय ढंग से निभाया है। उनके और उनकी मां के बीच फ्लैशबैक दृश्यों ने उनके चरित्र को भावनात्मक गहराई दी है।
रघुवीर यादव अपनी छोटी लेकिन प्रभावी भूमिका में हमेशा की तरह प्रभावित करते हैं, जबकि मुकेश तिवारी के हिस्से में अपेक्षाकृत कम दृश्य आए हैं।
हालांकि फिल्म का सबसे प्रभावशाली किरदार खलनायक निशा का है, जिसे इश्तियाक खान ने बेहतरीन तरीके से निभाया है। उनकी मौजूदगी कहानी में रोमांच और भय दोनों पैदा करती है।
कमजोर कड़ी
फिल्म की पटकथा और निर्देशन में यदि कुछ और परतें और जटिलता जोड़ी जातीं, तो इसकी प्रभावशीलता और बढ़ सकती थी। कई जगह कहानी एक ही दिशा में चलती नजर आती है और रहस्यों का खुलासा अपेक्षाकृत देर से होता है।
निष्कर्ष
‘द नर्मदा स्टोरी’ एक संवेदनशील सामाजिक-क्राइम ड्रामा है, जो महिला सशक्तिकरण, मानव तस्करी और ग्रामीण भारत में अपराध की जड़ों को उजागर करती है।
दमदार अभिनय, खासकर अश्विनी कलसेकर, सिमाला प्रसाद और इश्तियाक खान की मौजूदगी फिल्म को देखने लायक बनाती है। हालांकि कहानी में और गहराई की गुंजाइश थी, फिर भी यह एक सार्थक और प्रभावशाली सिनेमाई प्रयास है।

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