कोचिंग पर निर्भरता घटेगी, जेईई-नीट के कठिनाई स्तर की समीक्षा

नई दिल्ली. केंद्र सरकार जेईई और नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके लिए परीक्षा के कठिनाई स्तर की समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन परीक्षाओं की कठिनाई का स्तर कक्षा 12 के पाठ्यक्रम के स्तर के अनुरूप हो और ताकि छात्र स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ ही जेईई और नीट की तैयारी कर सके।

यह समीक्षा विशेषज्ञ समिति की राय के आधार पर होगी। शिक्षा मंत्रालय ने इस समिति का गठन जून में किया गया था। सूत्रों के मुताबिक समिति यह अध्ययन करने के लिए आंकड़ों का विश्लेषण कर रही है कि क्या परीक्षाओं का कठिनाई स्तर कक्षा 12 के पाठ्यक्रम के अनुरूप है, जो इन परीक्षाओं का आधार है। कुछ अभिभावकों और कोचिंग संस्थानों के संकाय सदस्यों का मानना है कि दोनों के बीच तालमेल नहीं है। इस कारण विद्यार्थियों को कोचिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर जेईई और नीट की परीक्षा का स्तर 12वीं के पाठ्यक्रम के अनुरूप कर दिया जाता है तो विद्यार्थियों को कोचिंग पर समय और पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में ही एडवांस तैयारी केंद्र बनाने की योजना भी बनाई है।

9 सदस्यीय समिति कर रही समीक्षा

शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग, डमी स्कूलों से जुड़ी समस्याओं व प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता की जांच के लिए जून में नौ सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति की अध्यक्षता उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी कर रही हैं। समिति में सीबीएसई अध्यक्ष, स्कूली व उच्च शिक्षा विभागों के संयुक्त सचिव, आइआइटी मद्रास, एनआइटी त्रिची, आइआइटी कानपुर और एनसीईआरटी के प्रतिनिधि शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और एक निजी स्कूल के प्राचार्य भी समिति का हिस्सा हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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