सबसे बड़े रॉकेट का परीक्षण, चांद-मंगल पर भी ले जाएगा

वाशिंगटन. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। उसने मंगलवार सुबह पांच बजे टेक्सास के बोका चिका से दुनिया के सबसे ताकतवर स्टारशिप रॉकेट का 11वां सफल परीक्षण किया। दुनिया के आधे हिस्से का चक्कर लगाने के बाद बूस्टर रॉकेट से अलग हो गया, जिसे 10 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी में सुरक्षित उतार लिया गया। रॉकेट ने अंतरिक्ष में डमी स्टारलिंक सैटेलाइट छोड़े और इंजन को दोबारा चालू करने का परीक्षण पूरा किया। यह चांद और मंगल मिशन के लिए जरूरी है। इसके बाद स्टारशिप रॉकेट वायुमंडल की गर्मी का सामना करते हुए हिंद महासागर में उतरा।
स्टारशिप अंतरिक्ष यान (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को पूरे तौर से स्टारशिप कहा जाता है। जिसका उद्देश्य भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े परीक्षण करना था। स्टारशिप की ऊंचाई 403 फीट है, जो लगभग 40 मंजिला इमारत के बराबर है। इसका उपयोग एलन मस्क मंगल ग्रह पर लोगों को भेजने के लिए करना चाहते हैं। 2023 में स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था।

अन्य ग्रहों पर जरूरी सामान ले जा सकेगा
स्टारशिप रॉकेट सैटेलाइट, स्पेस टेलिस्कोप और कार्गो को चंद्रमा, मंगल या अन्य ग्रहों पर ले जाने में सक्षम।
मून मिशन के लिए चांद की सतह पर कार्गो टांसपोर्टेशन की जरूरत को पूरी करेगा। बिल्डिंग ब्लॉक्स तक ले जाने में सक्षम।
एक घंटे से भी कम समय में दुनिया में कहीं की भी उड़ान।











