‘घरवाले चाहते थे नौकरी करूं, लेकिन कबड्डी ने दिखाई नई राह’: राहुल सेठपाल

जयपुर. हर मध्यमवर्गीय परिवार की तरह राहुल सेठपाल के माता-पिता भी चाहते थे कि वे पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी पा लें। लेकिन राहुल का सपना कुछ और था। उनके दोस्त जब कबड्डी खेलने जाया करते तो राहुल का भी मन करता। पहली बार खेलने पर जर्सी मिली तो इस खेल के प्रति जुनून जागा। आज इस खेल की बदौलत उनके पास नौकरी व पहचान है। प्रो कबड्डी लीग में हरियाणा स्टीलर्स के उपकप्तान नियुक्त राहुल सेठपाल से पत्रिका की विशेष बातचीत…
जूनियर नेशनल में जीत चुके हैं पदक: राहुल 2020 और 2021 में जूनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे हैं। राहुल ने हरियाणा स्टीलर्स को 2024 में उसका पहला खिताब दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने सीजन-11 में 24 मैचों में 73 अंक टैकल से हासिल किए थे। वे कुल 207 टैकल पाइंट हासिल कर चुके हैं।

प्रो कबड्डी हम जैसे खिलाड़ियों के लिए अच्छा मंच साबित हुआ: राहुल के अनुसार, प्रो कबड्डी लीग हमारे जैसे खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन मंच है। प्रो कबड्डी की टीम फ्रेंचाइजियां हमें वह मंच प्रदान करती हैं जिससे हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खुद को तैयार कर पाते हैं। यहां अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हमारे साथ खेलते हैं, जिनसे काफी सीखने को मिलता है। प्रो कबड्डी ने मुझे आर्थिक रूप से मजबूत बनने में भी काफी मदद की है। गांव की मिट्टी से मैट पर कबड्डी खेलने का मेरा सफर शानदार रहा है, उम्मीद है यह और आगे तक जाएगा।
प्रो कबड्डी में यू मुंबा के लिए 2021 में राहुल ने किया था डेब्यू
भारत के लिए खेलने का सपना: प्रो कबड्डी लीग में पहचान बनाने के बाद अब राहुल भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल ने कहा, मेरा लक्ष्य अगले साल होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना है। देश के लिए खेलना हर खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है। मैं भी देश के लिए पदक जीतना चाहता हूं।
पहले परिवार वाले मना किया आज मेरे लिए प्रार्थना करते हैं
राहुल ने कहा, पहले मां और पापा मुझे मना करते थे कबड्डी खेलने के लिए, लेकिन फिर जब मुझे सफलता मिलने लगी तो उनका नजरिया भी बदल गया। आज वे मेरी सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं। कबड्डी खेलने के कारण ही मुझे भारतीय सेना में हवलदार के पद पर नियुक्ति मिली है। आज उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। राहुल ने बताया कि मेरे साथी खिलाड़ी नितिन रावल की मेरे यहां तक पहुंचने में काफी अहम भूमिका रही है।











