नारी शक्ति: मंजू ने महिलाओं को जागरूक किया तो पूरे गांव की दशा बदल गई

सोच: जागरुकता आपके अंदर आत्मविश्वास को बढ़ाती है और आपके लिए नए रास्ते खोलती है।

सरिता दुबे
रायपुर। महासमुंद के पिथौरा ब्लाक के पिलवापाली गांव की रहने वाली 30 साल की मंजू लता मिरी कहती हैं कि मैं कल जैसी थी आज वैसी नहीं हूं, मु्झे गर्व हैं कि मैं नारी हूं। मेरा ऐसा मानना हैं कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा नेतृत्व करना चाहिए तभी समाज की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। 16 साल की उम्र से अपने समुदाय के लिए कार्य करने वाली मंजू कहती हैं कि जब होश संभाला तो अपने ही समुदाय के लोगों के हक को कुछ पूंजीपतियों द्वारा छीनते देखा। मैंने दलित आदिवासी संगठन की राजिम दीदी से संपर्क किया और कहा कि मैं अपने समुदाय के लिए काम करना चाहती हूं। राजिम दीदी ने मेरे परिवार वालों को राजी किया और 16 साल की उम्र से मेरी पूंजीपतियों के साथ लड़ाई शुरू हुई जो आज तक चल रही है।

वन अधिकार क्या होता है, हम जानते नहीं थे

हम जानते ही नहीं थे कि वन अधिकार क्या होता है। हम समझते थे कि जंगल की जमीन वन विभाग की है। जब जिंदल कंपनी ने हम किसानों के जमीन के पट्टे खुद के नाम करवा लिए तो हमें अपनी ही जमीन से बेदखल किया जाने लगा। साल 2015 में वन विभाग किसानों का पट्टा ले गया। साल 2020 में वन विभाग का अमला किसानों को घर से बेदखल कर उनकी फसलों पर दवा छिड़काव करने लगा, पशुओं को खेतों में छोड़ दिया गया। हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि हम क्या करें, कहां जाए? तब हमें दलित आदिवासी संगठन का साथ मिला और हमने अपने समुदाय की समस्या को दूर करने के लिए दलित आदिवासी मंच बनाया।

महिलाएं पहुंची ग्राम सभा में

मंजू बताती हैं कि कि हमने अपने मंच के जरिए पहले समुदाय के लोगों को जागरूक किया। महिलाओं को उनके अधिकार की जानकारी दी और बताया कि कानून ने महिलाओं को बहुत से अधिकार दिए है, क्योंकि समुदाय की महिलाएं घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना से गुजर रही थी। उन्हें जागरूक किया। आज भी हर माह इसी तरह के कई मामले आते है, लेकिन अब महिलाएं अपने अधिकार की बात करने लगी हैं। वो ग्राम सभा में अपनी बात रखती हैं। कई महिलाओं ने अपना ग्रुप बनाया हैं जो समुदाय के लिए गांव और जिला दोनों में कार्य करती हैं।

दावा आपत्ति के बाद हालात थोड़े ठीक

मंजू कहती हैं कि जब हमने अपनी जमीन के लिए प्रशासन के पास दावा आपत्ति लगाई तो हमें बहुत सी जानकारी हुई। उस समय भी वन विभाग हमारी जमीन पर पौधरोपण करना चाह रहा था लेकिन समुदाय के लोगों की एकजुटता और जागरुकता के चलते वन विभाग पीछे हटा। हमारी जमीन को शासकीय जमीन घोषित किया गया। अभी भी हमारी लड़ाई चल रही हैं और जल्द ही हमें अपनी जमीन मिल जाएगी।

महिलाओं के नाम ज्यादा जमीन

समुदाय की जमीन में 186 लोगों के नाम हैं, जिसमें 100 महिलाएं हैं। मंजू कहती हैं कि समुदाय के लिए काम करना अच्छा लगता है खास कर महिलाओं के लिए कार्य करने से यह समझ आया कि महिलाएं यदि जागरूक होगी तो पूरे समुदाय की दिशा और दशा दोनों ही बदल देती हैं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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