Nari Sakti: रद्दी से बनाई नोटबुक बच्चों के लिए मददगार

पुणे की प्रीतू चौधरी ने कचरे को संसाधन में बदलकर शिक्षा और पर्यावरण, दोनों को नई दिशा दी है। उन्होंने रद्दी को रीसाइकिल करके नोटबुक बनाना शुरू किया और इन्हें जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया। वह कहती हैं कि मुझे कई ऐसे बच्चे मिले जो आर्थिक कारणों से नोटबुक नहीं खरीद पाते थे और पढ़ाई के लिए साझा नोटबुक का उपयोग करते थे।
मैं हमेशा से इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी। वहीं, चारों तरफ बिखरे कचरे की समस्या भी बड़ी थी। मैं ऐसा समाधान चाहती थी जिससे दोनों समस्याओं का हल निकल सके। इसी उद्देश्य से वर्ष 2014 में उन्होंने एक संस्था शुरू की, जो रद्दी को रीसाइक्लिंग तक पहुंचाने और उससे बनी नोटबुक को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने में मदद करती है। उन्होंने अब तक 1 लाख किलो से अधिक पुराने पेपर को रीसाइकल किया है।

रद्दी के बदले नोटबुक
प्रीतू बताती हैं कि रद्दी को रीसाइकिल करने के लिए पुराने पेपर का संग्रह करना सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कॉलोनियों में जाकर लोगों से मिलना शुरू किया और उन्हें समझाया कि वे अपने घर की रद्दी एकत्र करके उन्हें दें। एकत्रित रद्दी को रीसाइकिल करके नोटबुक तैयार की जाती है। लोगों को दो किलो पुराने पेपर के बदलेे दो नोटबुक दी जाती हैं या वे इन्हें वंचित बच्चों को भिजवा सकते हैं। हर घर को 10 किलो रद्दी एकत्रित करनी होती है तभी संस्था की तरफ से गाड़ी उसे लेकर जाती है।
कम पानी का उपयोग
प्रीतू बताती हैं, एक टन वर्जिन पेपर बनाने के लिए 10-15 पेड़ कटते हैं और 45-50 क्यूबिक मीटर पानी खर्च होता है, जबकि रीसाइक्लिंग पेपर बनाने के लिए केवल 1,100 किलोग्राम पुराने कागज और 4-5 क्यूबिक मीटर पानी की आवश्यकता होती है।











