Nari Shakti: खुद के दर्द को भूल, रुकवा रहीं बाल विवाह

कभी रिश्तों की बेड़ियों में जकड़ी जिंदगी के बीच बिहार के किशनगंज की रोशनी परवीन ने हार मानने के बजाय अंधेरों में उजाला खोजा और अन्य बच्चियों का जीवन प्रकाशमान किया। रोशनी बताती हैं कि 2014 में केवल 14 साल की उम्र में उनकी शादी 45 साल के आदमी से कर दी गई थी।

विवाह के बाद उन पर अत्याचार हुए। ससुराल छोड़कर मायके गई तो माता-पिता ने भी साथ नहीं दिया। अंत में उन्होंने माता-पिता का घर भी छोड़ दिया। 20217 में एक एनजीओ के साथ काम किया तो अहसास हुआ की उनकी तरह इस दर्द से कई महिलाएं गुजर रही हैं। फिर बाल विवाह रोकने के लिए प्रयास शुरू किए।

खुद के दर्द को भूल, रुकवा रहीं बाल विवाह

करती हैं समझाइश वह बताती है कि आज भी गांवों में कई इलाके ऐसे हैं, जहां लड़कियों को बाल विवाह के लिए मजबूर किया जाता है और अधिक उम्र के व्यक्ति से विवाह कर दिया जाता है। उन्होंने कुछ संगठनों के साथ मिलकर काम शुरू किया और जहां भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, वहां वह माता-पिता और गांववालों की काउंसलिंग करती हैं। साथ ही परिजनों को बाल विवाह से होने वाले शारीरिक और मानसिक समस्याओं के लिए बताया जाता है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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