Nari Shakti: बच्चों के लिए मसीहा बने रिटायर्ड दंपती, किया शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के सीम गांव में सेवानिवृत्त जया और अतुल शाह ने बच्चों के जीवन में किताबों की कमी पूरी करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया और बच्चों के जीवन को रोशन किया।
पहले दिन आए 35 बच्चे
जया कहती हैं कि 2016 में सेवानिवृत्ति के बाद गांव आए तो पता चला कि यहां पढ़ाई की गुणवत्ता बहुत कम थी। बच्चों के पास पर्याप्त किताबें नहीं थीं। मैंने, अतुल के साथ मिलकर अपने घर में लाइब्रेरी खोली, जिसमें जरूरतमंद बच्चे बिना किसी फीस के पढ़ाई कर सकें। पहले ही दिन 35 बच्चे आए और मुझसे पढऩे की इजाजत मांगी। दूसरे दिन यह आंकड़ा 50 हो गया। अब यहां प्रतिदिन 7 गांवों के बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं।

डिजिटल लैब
वह बताती हैं कि किताबों के साथ बच्चों को उन्होंने मुफ्त में ट्यूशन देना भी शुरू किया ताकि उनका आधार मजबूत हो सके। वह स्वयं बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाती हैं और इसमें उनके कई दोस्त भी उनकी मदद करते हैं। अतुल ने एक डिजिटल लैब भी बनाई, जहां गांव के युवा और महिलाएं कंप्यूटर कौशल सीखते हैं। बच्चे किताबें घर ले जाते हैं और दादा-दादी को पढ़-पढक़र सुनाते हैं। यहां विभिन्न तरह की 1400 पुस्तकें हैं। बच्चों के लिए यहां विभिन्न तरह की गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।
अपने खर्च पर ली किताबें
वह बताती हैं कि जब लाइब्रेरी शुरू की तो हमारे पास कुछ ही किताबें थीं। बच्चों से मिलकर पता चला कि उन्हें काफी सारी किताबें चाहिए। इसके लिए हमने दान दाताओं से संपर्ककिया और बहुत सारी किताबें अपने खर्च से खरीदी।











