आंगनबाड़ियों में पोषण शिक्षा को नई दिशा
New direction for nutrition education in Anganwadis

आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षक प्रशिक्षण, पोषण बाड़ी विकसित करने पर जोर
बच्चों के पूरक पोषण आहार में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने की पहल
रायपुर । महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण संवर्धन प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय खाद्य संसाधनों पर आधारित पोषण शिक्षा और पोषण बाड़ी की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले में ‘निरमान’ संस्था द्वारा डब्ल्यूएचएच परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पोषण शिक्षा को व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है।
इस पहल के तहत दंतेवाड़ा जिले की आठ परियोजनाओं में आंगनबाड़ी सहायिकाओं को स्थानीय, विविध एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के महत्व के साथ-साथ मिलेट्स आधारित पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के पूरक पोषण आहार को अधिक पौष्टिक, संतुलित और स्थानीय संसाधनों पर आधारित बनाना है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण बाड़ी (न्यूट्री गार्डन) विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि केंद्रों में फल एवं हरी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और बच्चों को ताजा एवं पौष्टिक आहार मिल सके।
इसी कड़ी में प्रशिक्षण के बाद ‘निरमान’ टीम ने परियोजना अधिकारियों के सहयोग से दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में पपीता, कटहल, अमरूद, सहजन (मोरिंगा), भिंडी, लौकी, बरबटी, मक्का एवं कद्दू सहित विभिन्न फलदार एवं सब्जी फसलों के पौधे और बीज रोपे। आगामी चरण में बारसूर परियोजना के 30 से 40 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पोषण बाड़ी विकसित की जाएगी।











