मुश्किल वक्त में किशोरियों की पीड़ा समझ शिक्षक बन गए पैडमैन, 6.80 लाख पैड बांटे

पालनपुर (गुजरात). एक छोटा सा कदम मुश्किलों के बड़े से बड़े फासले कम कर सकता है। गुजरात के एक शिक्षक का ऐसा ही कदम शिक्षा के साथ ही स्वच्छता का उजाला फैला रहा है। गुजरात के पैडमैन के नाम से मशहूर पालनपुर के कला शिक्षक नयन चत्रारिया तीन साल से 10 से 14 वर्ष की जरूरतमंद किशोरियों को नि:शुल्क सैनेटरी पैड उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने सैनिटरी पैड वितरण स्थल भी बनाया है। वे गांवों में जाकर इसके बारे में जानकारी भी देते हैं। भ्रांतियां व संकोच दूर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने मुश्किल दिनों में परिवार व आसपास की किशोरियों की पीड़ा और पैड के उपयोग की झिझक समझकर यह पहल शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बेटियों को सड़क या सार्वजनिक स्थान पर अचानक आवश्यकता होने पर बिना झिझक पैड प्राप्त हो सकें।

गुजरात और देश के लिए बने प्रेरणा
चत्रारिया ने बताया कि इस पहल के माध्यम से यह भी संदेश देना चाहते हैं कि समाज में महिलाओं से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना झिझक खुलकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि मुश्किलों को कम किया जा सके। उन्होंने कहा, पालनपुर से शुरू हुई यह पहल गुजरात और पूरे देशभर लागू की जा सकेगी। इससे बेटियों की मुश्किलें आसान होंगी।
तीन साल में 476 गांवों का दौरा किया
शिक्षक चत्रारिया ने तीन साल में उत्तर गुजरात के 476 गांवों का दौरा किया और 76,123 बेटियों को 3.80 लाख से अधिक सैनिटरी पैड नि:शुल्क वितरित किए हैं। खास बात ये है कि इसका पूरा खर्च वे खुद उठाते हैं। उन्होंने अब इस अभियान को गुजरात के विभिन्न शहरों और गांवों तक फैलाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।











