नारी शक्ति: पहाड़ी क्षेत्रों में मशरूम की खेती की समस्या को आसान बनाकर नागालैंड की बेटी ने किया कमाल

नागालैंड की ल्हुवेवोलु ए. रहाखो सेहत से जुड़े लाभ लेने के लिए पहाड़ी क्षेत्र में मशरूम उगा रही थीं, लेकिन उनके इस प्रयास ने किसान परिवारों को खेती का नया मार्ग दिखाया।

बिना रसायन खेती

ल्हुवेवोलु कहती हैं कि तापमान और आर्र्दता के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मशरूम की खेती मुश्किल थी। इसके लिए मैंने खेती की कई किताबें पढ़ी और तब मुझे ओक पद्धति का विचार आया। इसका प्रशिक्षण लिया। कटे हुए ओक की लकड़ी पर प्रयोग किया और सफल रही। फिर ओक पद्धति यानी कठोर लकड़ी पर बिना किसी रसायन केमशरूम की खेती शुरू की।

किसानों को प्रशिक्षण

वह कहती हैं कि केवल खेती करना ही काफी नहीं था, इसे आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने एक संगठन बनाया। जिसमें किसानों को नर्सरी, पौध, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाता है। इस सामूहिक प्रयास से आज कई परिवार आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे हैं। उनके उत्पादों में शीताके चटनी, सूखे टुकड़े और पाउडर शामिल हैं।

ओक पद्धति

वह बताती हैं कि ओक पद्धति कठोर लकड़ी पर मशरूम उगाने की प्रक्रिया है। इससे शीताके और ऑयस्टर मशरूम उगाया जा सकता है। इसमें 3-6 इंच मोटे और 3-4 फीट लंबी ओक की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति की विशेषता है कि इससे लम्बे समय तक ज्यादा उत्पादन हो सकता है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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