नारी शक्ति: घर से शुरू किए ई-वेस्ट मिशन को पुष्पा ने स्कूलों तक पहुंचाया

टी हुसैन. रायपुर जिले में आरंग के बद्रीप्रसाद लोधी गवर्नमेंट कॉलेज में पढ़ने वाली बीएससी सेकंड ईयर की स्टूडेंट पुष्पा ने बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान (ई-वेस्ट) से 50 तरह की उपयोगी वस्तुएं तैयार कर अनोखी शुरुआत की है। अब अपनी इस पहल को वो सरकारी स्कूलों तक पहुंचा रही हैं, जिसमें उसका परिवार और गांव वाले साथ दे रहे हैं। नवा रायपुर से लगे ग्राम तोरला की रहने वाली पुष्पा कहती हैं कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मिट्टी और पानी दोनों को नुकसान होता है। इसलिए उन्होंने ठान लिया है कि इस कचरे से कुछ नया और काम का बनाया जा सकता है। उनके इस काम में भाई और गांव के ही कुछ युवा भी शामिल हैं।
50 से ज्यादा उपयोगी चीजें बनाई
पुष्पा अब तक घरेलू ई-वेस्ट से लगभग 50 तरह की उपयोगी वस्तुएं तैयार कर चुकी हैं। इनमें वैक्यूम क्लीनर, मिनी टेबल फैन, हैडफोन, एक्सटेंशन बॉक्स, रोबोट, टॉर्च, टेबल लैंप, वॉल क्लॉक, ब्लुटूथ स्पीकर एंड माइक, डोर बेल, की-बोर्ड लैंप, पावर बैंक और डेकोरेटिव लाइट जैसी चीजें शामिल हैं। इन नवाचारों ने न केवल घर-परिवार और दोस्तों को चौंकाया, बल्कि कई प्रदर्शनियों और प्रतियोगिताओं में भी सराहना पाई। पुष्पा सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को न सिर्फ समझाती हैं, बल्कि उन्हें हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी देती हैं। कई बच्चे उनके घर आकर मॉडल बनाना सीखते हैं।

पिता से मिली प्रेरणा
पुष्पा बताती हैं कि उनके पिता योगेश साहू, जो इलेक्ट्रिशियन और प्लम्बर हैं। घर पर अक्सर इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ पड़े रहते थे। शुरुआत उनके भाई मोक्षराज ने की, जिन्होंने ई-वेस्ट से छोटे-छोटे मॉडल बनाए। धीरे-धीरे पुष्पा भी इस क्रिएशन में शामिल हो गईं। दोनों भाई-बहन ने अब तक 20 से अधिक प्रदर्शनियों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और कई पुरस्कार भी जीते हैं।

भविष्य की राह
पुष्पा का सपना है कि उनका ई-वेस्ट मिशन और बड़ा आकार ले। वे चाहती हैं कि हर विद्यार्थी अपने आसपास के ई-वेस्ट को फेंकने की बजाय नई चीजों में बदलना सीखे, ताकि पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ उपयोगी वस्तुएं भी बन सकें।











