सोशल मीडिया की लत को बीमारी माना, इलाज के लिए बनेंगे नियम

चंडीगढ़. सोशल मीडिया की लत का समाधान ढूंढने के लिए चिकित्सा विज्ञान को भी मजबूर होना पड़ा है। पीजीआई चंडीगढ़ के नशा मुक्ति विभाग ने किशोरों में सोशल मीडिया की लत से मुक्ति दिलाने के लिए व्यापक अध्ययन शुरू किया है, ताकि नियमावली तैयार की जा सके।
इस नियमावली का उद्देश्य माता-पिता और बच्चों को डिजिटल दुनिया की जटिलताओं को समझने और उनसे निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है। अध्ययन का नेतृत्व कर रही शालिनी नाइक ने शनिवार को पीजीआइ चंडीगढ़ में शनिवार को आयोजित इंडियन एसोसिएशन फॉर सोशल साइकियाट्री सम्मेलन में कहा कि नियमावली तैयार करने का निर्णय 15-18 आयु वर्ग के किशोरों में डिजिटल लत के बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया है।

उन्होंने कहा, पहले जहां धूम्रपान और नशीली दवाओं का सेवन चिंता का विषय थे, वहीं अब डिजिटल लत उससे भी बड़ी चिंता के रूप में उभरी है। इसमें आत्मसम्मान में कमी, अकेलापन और खोए रहने जैसे लक्षण नजर आते हैं। उन्होंने कहा, किशोरों को आसानी से प्रभावित किया जा सकता है। वे एक नारे पर आकर्षित हो सकते हैं। बांग्लादेश और नेपाल की घटना में यह दुनिया ने देखा। लाइक्स, कमेंट्स और रिजेक्शन से उनकी भावनाएं उत्तेजित हो सकती हैं, उनके लिए व्यसन बन जाते हैं।
नियमावली युवाओं को डिजिटल दुनिया के प्रति संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करेगी। गलत व सही के बीच अंतर करना आसान होगा। उन्हें साइबर बुलिंग और अनचाहे यौन प्रस्तावों के जाल से बचने में मदद करेगा।











