सवाल पूछने पर मजबूर करतीं कहानियां, जवाब किसी के पास नहीं

मुंबई. मैं मयूरिका बिश्वास, मैंने अपने कॅरियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। कई नेशनल न्यूज चैनलों में काम किया। मेरी रुचि कहानियां कहने में थी, इस दौरान एक नेशनल चैनल में काम करते हुए मुझे बड़ा शो लाइन ऑफ ड्यूटी मिला, जो मेरे कॅरियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस शो ने मुझे देश के फ्रंटलाइन इलाकों सियाचीन ग्लेशियर, कश्मीर, मिजोरम, सूरतगढ़ के ट्रेकिंग जोन और नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर विराट तक पहुंचाया। माइनस डिग्री में शूटिंग करना ही मेरी असली ट्रेनिंग थी।

फिर बनाई डॉक्यूमेंट्री

फिर एक प्रोडक्शन हाउस से जुड़ी। जहां से मैंने अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा। मुंबई आतंकी हमलों पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री और ट्रू क्राइम शृंखलाओं की एक सीरीज की। कई प्रोजेक्ट्स में सीआइए जैसी एजेंसियों के साथ रिसर्च साझा की। इसके बाद खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया।

Resurrection Quest मेरे लिए अब तक का सबसे महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। कान्स में मिले ग्लोबल डॉल्फिन अवॉर्ड ने इसको अंतरराष्ट्रीय पहचान दी और पहुंच को कई गुना बढ़ा दिया। इस सीरीज में कई और कहानियां हैं, जैसे चीन में लोग अपने पालतू कुत्तों को क्लोन कर रहे हैं। ये सभी कहानियां हमें सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमें हर विलुप्त प्रजाति को वापस लाना चाहिए? कौन तय करेगा कि किसे वापस लाया जाए, सरकार या निजी कंपनियां ? इन सवालों के जवाब शायद किसी के पास नहीं हैं, लेकिन इन्हें उठाना जरूरी है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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