‘सुल्तान’ और ‘दंगल’ ने युवराज को पहुंचाया इंडियन टीम में, जानें चैंपियन की कहानी

रायपुर. फिल्म से किसी का जीवन भी बदल सकता है यह हकीकत में कम ही देखने को मिलता है, लेकिन जगदलपुर में रहने वाले 17 साल के युवराज सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ कि 8 साल की उम्र में सुल्तान और दंगल फिल्म देखकर कुश्ती सीखने की जिद पकड़ी और युवराज की इसी जिद ने म्युथाई का चैंपियन बना दिया।

10 साल की उम्र से लगातार नेशनल और स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड लेने वाले युवराज बीते 7 साल में 14 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। 8 साल की उम्र से खेलना शुरू किया और 10 साल की उम्र से लगातार जीत रहे युवराज का सफर इतना आसान भी नहीं था, लेकिन रोजाना 5 घंटे की प्रैक्टिस और लगन से युवराज को सफलता मिलती गई और उसका इतनी कम उम्र में भारतीय टीम में सलेक्शन हुआ।
बस्तर संभाग में नहीं है बॉक्सिंग रिंग
युवराज के पिता राजेंद्र सिंह कहते हैं कि पूरे बस्तर संभाग में बॉक्सिंग रिंग नहीं है इसलिए हमने अपने घर पर ही रिंग बनवाई। कोच अब्दुल मोईन प्रैक्टिस कराते थे। कुछ दिन बाद ही युवराज का खेल देखकर कोच ने कहा कि इसे म्युथाई सिखाओ, यह मैडल जीतेगा। राजेंद्र सिंह यूट्यूब के जरिए उसे घर पर सिखाते थे।

शुरुआत से ही खेल के लिए करते थे प्रेरित
युवराज के पिता कहते हैं कि जब युवराज 5 साल का था तो उसी समय से उसको खेल के लिए प्रेरित करने लगा। 6 साल की उम्र से ही उसे क्रिकेट, फुटबॉल और बैडमिंटन सिखाया, लेकिन कुछ दिन सीखने के बाद उसने बैटमिंटन, फुटबॉल और बैट को सजा कर रख दिया। कुछ दिन बाद सुल्तान और दंगल फिल्म देखने बाद युवराज कुश्ती सीखने के लिए पूरे घर में लोगों को मनाने लगा।











