सुप्रीम कोर्ट ने कहा- महिलाएं सबसे बड़ी अल्पसंख्यक, राजनीतिक समानता जरूरी

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को तुरंत लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर की गई थी, जिसमें अधिनियम को परिसीमन और जनगणना जैसे पूर्व शर्तों के बिना लागू करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि अदालत इस याचिका पर विचार करेगी, लेकिन नीति संबंधी मामलों में हस्तक्षेप की सीमाएं हैं। उन्होंने कहा, सभी नागरिकों को सामाजिक और राजनीतिक समानता का अधिकार है। देश में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक कौन है? महिलाएं, जो लगभग 48 प्रतिशत हैं। यह महिलाओं की राजनीतिक समानता का प्रश्न है।

यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने अधिवक्ता वरुण ठाकुर के माध्यम से दाखिल की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अदालत में दलील दी कि 75 वर्षों की आजादी के बाद भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। गौरतलब है कि यह अधिनियम सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे संविधान में शामिल किया गया। हालांकि, इसके कार्यान्वयन को अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिससे इसके लागू होने में समय लग सकता है।

महिला सांसदों की हिस्सेदारी सिर्फ 15 प्रतिशत

याचिका में कहा गया है कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है। लोकसभा में महिला सांसदों की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है, जबकि कई राज्यों में यह 10 प्रतिशत से भी कम है। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि समानता के संवैधानिक सिद्धांत का सम्मान करते हुए भी कानून को लागू करने का समय और तरीका तय करना कार्यपालिका का अधिकार क्षेत्र है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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