कुरैशी सिस्टर्स की प्रेरक कहानी… वर्दी न मिलने का दर्द, उठाई समाज सेवा की जिम्मेदारी

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी की देशभर में चर्चा हो रही है, पर कम ही लोग जानते हैं कि उनकी जुड़वां बहन डॉ. शाइना की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। शाइना ने भी आर्मी जॉइन करने का सपना देखा था, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका।

आज वह सिंगल मदर होकर समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण में एक्टिव हैं। एक इंटरव्यू में शाइना ने कहा, ‘बचपन से हम लोग सुनते आए हैं, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी। दादी-नानी की कहानियां सुन-सुनकर ऐसा लगता था कि बस कुछ बड़ा करना है। मेरे भी दिल में हमेशा वर्दी की तस्वीर थी। एनसीसी ज्वॉइन किया, शूटिंग में बेस्ट बनी, प्राइम मिनिस्टर से अवॉर्ड मिला, गुजरात गवर्नमेंट से गोल्ड मेडल.. पर दिल में तो एक ही वाहिश थी- आर्मी की वर्दी पहननी है।’

बच्चों के लिए जुटाती हैं फंड

शाइना कहती हैं, ‘सिंगल पेरेंट्स होने पर बच्चों की परवरिश, कॅरियर, फाइनेंशियल प्रेशर – सबकुछ खुद ही संभालना पड़ता है। उस वक्त समझ आता है कि असली स्ट्रॉन्ग कौन है। ये सबकुछ कोई सिखाता नहीं है, हालात सिखा देते हैं। मैं ज्यादातर समय सोशल वर्क करती हूं। मैं और सोफिया मिलकर बच्चों के लिए फंड जुटाते हैं, सिंगल वीमन को स्किल्स सिखाते हैं, ताकि वो खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें । कई बार फंड नहीं होता, फिर भी मैं कोशिश करती हूं। जब आप दिल से काम करते हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।’

नहीं हुआ चयन

शाइना ने बताया, ‘आर्मी ऑफिसर बनने के लिए सर्विस सलेक्शन बोर्ड एग्जाम दिया था, लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ। बहन का मिसाइलमैन अब्दुल कलाम के साथ काम करने का सपना था। जैसे ही आर्मी में लड़कियों के लिए एंट्री खुली, हम दोनों ने तय किया अब तो जाना ही है। पर मेरे लिए दरवाजा बंद हो गया। वो दर्द आज भी है।’

मेरी धड़कनें तेज हो गईं:

अचानक किसी ने कॉल कर बताया कि %टीवी ऑन करो, तुहारी सिस्टर आ रही है।% पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। जब स्क्रीन पर देखा कि मेरी बहन ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग कर रही है, तो मेरी धड़कनें तेज हो गईं।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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