रायपुर वर्कशॉप में तैयार गर्डर से मिजोरम में बने सबसे बड़े पियर वाले ब्रिज पर दौड़ेंगी ट्रेनें

रायपुर. देश के पूर्वोत्तर राज्यों में से एक मिजोरम दुर्गम पहाड़ियों पर परंतु प्राकृतिक खूबसूरती से ढका है। इस राज्य की राजधानी आइजोल अब भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जुड़ गई है। इसके साथ ही देश का यह राज्य अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से दूर नहीं रहा। 8000 करोड़ रुपए की लागत से इंजीनियरों ने पहाड़ों को चीरते हुए 52 किलोमीटर रेललाइन तैयार की है। 153 पुलों वाली इस रेललाइन पर एक कुतुबमीनार से भी ऊंचे पियर वाले ब्रिज पर ट्रेनें अब दौड़ने वाली है।
इन पुलों के नीचे जो गर्डर लगाए गए हैं, उसे रायपुर की वर्कशॉप में तराशा गया था। आने वाले समय में मिजोरम भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच व्यापार का बड़ा केंद्र बनेगा।

मिजोरम के लोगों में इस बात की खुशी है कि आइजोल से 35 साल बाद ट्रेन चलने वाली है। अभी तक केवल बइरबी स्टेशन तक ही रेलवे लाइन थी। जबकि देश के अनेक राज्यों में जाने के लिए उन्हें 7 से 8 घंटे का सफर टैक्सी या बसों से करना पड़ता था, अब उनकी आवाजाही आसान होगी। इसके साथ ही पर्यटन और रोजगार बढ़ेगा।
13 को रेल परियोजना का लोकार्पण
मालगाड़ी से सभी सामग्री सीधे पहुंचेगी तो सस्ती मिलेगी। इन दिनों मिजोरम की राजधानी में रेलवे की इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को लेकर हलचल तेज है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे देश को समर्पित करने वाले हैं। तैयारियों तेजी से चल रही हैं। एनएफआर रेलवे और आईबी के अफसरों की आवाजाही लगातार हो रही है। 13 सितंबर को मोदी इस रेल परियोजना का लोकार्पण करने वाले हैं।
जानिए…ऐसे तैयार हुई 52 किमी रेललाइन
11 साल में तैयार हुई सैरांग-बइरबी रेल परियोजना
51.38 किमी इस लाइन पर 45 सुरंगें और 153 पुलों का निर्माण कराना पड़ा
7 घंटे की सड़क यात्रा ट्रेन से 3 घंटे में पूरी होगी
भारत का दूसरा सबसे ऊंचा पियर ब्रिज (114 मी., कुतुबमीनार से भी ऊंचा) इस रेल लाइन पर है।
इस रेलमार्ग में 45 सुरंगें बनाईं, जिनमें 12.8 किमी लंबी चट्टानों को काटकर तैयार किया गया।











