शाला प्रवेशोत्सव में बच्चों का आत्मीय स्वागत
Warm welcome to children at the school enrollment festival.

पुस्तक एवं साइकिल वितरित कर कहा – मन लगाकर पढ़ें, अपने माता-पिता, विद्यालय और जिले का नाम करें रोशन
रायपुर । उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री श्री लखनलाल देवांगन आज कोरबा के पीएम श्री सेजस, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बालको में आयोजित शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का माथे पर तिलक लगाकर एवं मुंह मीठा कर आत्मीय स्वागत किया। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें एवं साइकिल वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री देवांगन ने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा जिले का नाम ऊँचा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही जीवन में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के शासकीय विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन रहे हैं। प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की समस्या का समाधान हुआ है तथा सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है। जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से नए विद्यालय भवनों का निर्माण कराया जा रहा है और शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर मंत्री श्री देवांगन ने बच्चों, जनप्रतिनिधियों एवं अभिभावकों के साथ न्योता भोजन में भी सहभागिता की तथा विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद कर उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन एवं संस्कारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में पार्षद श्री सत्येंद्र दुबे, एल्डरमैन श्रीमती मंदाकिनी त्रिपाठी, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री जे.एन. दुबे, प्राचार्य श्री नीलकंठ राठौर, श्री प्रफुल्ल तिवारी सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।











