World Dance Day: चाहे उम्र हो 40 पार… डांस देगा तंदुरुस्ती और खुशियां अपार

रायपुर. उम्र चाहे कोई भी हो, फिटनेस हमेशा जरूरी है। खासकर जब 40 का पड़ाव पार हो जाता है, तब शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में नृत्य एक बेहतरीन माध्यम बन सकता है, जो न केवल शरीर को लचीला बनाए रखता है बल्कि मन को भी प्रसन्नचित्त रखता है।
चिकित्सकों व फिटनेस विशेषज्ञों का भी मानना है कि नियमित नृत्य से हृदय, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार नृत्य करते समय एंडॉर्फिन हार्मोन (खुशी का हार्मोन) सक्रिय होता है, जो तनाव को कम करने और मूड बेहतर बनाने में मदद करता है। सामूहिक नृत्य सत्रों में शामिल होने से सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

जिम में घंटों पसीना बहाने या भारी-भरकम एक्सरसाइज करने से कई बार बोरियत महसूस होती है। लेकिन नृत्य में लय और संगीत के साथ शरीर का सहज व्यायाम होता है। नृत्य करते समय व्यक्ति थकान महसूस नहीं करता, बल्कि संगीत की तरंगों पर झूमते हुए अनजाने में ही खुद को फिट कर लेता है। यही वजह है कि 40 पार के लोग भी अब जुम्बा, साल्सा, फोक डांस और भरतनाट्यम जैसी विधाओं को स्वास्थ्य के लिए अपना रहे हैं।
ऐसे करें शुरुआत
पसंद के अनुसार कोई भी डांस फॉर्म चुनें। चाहे शास्त्रीय, फोक या वेस्टर्न।
शुरुआत धीमी गति से करें और शरीर को लय में लाने का समय दें।
सप्ताह में कम से कम 3 दिन डांस प्रैक्टिस करें।
डांस से पहले वार्मअप और बाद में स्ट्रेचिंग करना न भूलें।
स्वास्थ्य समस्याओं के मामले में डॉक्टर से परामर्श लें।
धीरे-धीरे बढ़ाएं समय: पहले सप्ताह 15-20 मिनट डांस करें, फिर धीरे-धीरे45 मिनट तक बढ़ाएं।
डांस स्टाइल मिक्स करें: सप्ताह में एक दिन फोक डांस, एक दिन कार्डियो जुम्बा जैसे फॉर्म्स अपनाएं।
डांस पार्टनर बनाएं: दोस्त या परिवार के साथ डांस करने से मोटिवेशन बढ़ेगा।
अपना वीडियो बनाएं: समय-समय पर अपना डांस रेकॉर्ड कर सुधार करें।
जिप्सा महाराजा, फिटनेस एक्सपर्ट
तंदुरुस्ती के लिए बहुत फायदेमंद
नृत्य शारीरिक व्यायाम का सबसे सहज और आनंददायक तरीका है। 40 की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, हड्डियां कमजोर पड़ती हैं। ऐसे में सप्ताह में 3-4 दिन डांस करना हृदय और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
सुधीर राजपाल, र्स्पोट्स टीचर, मेडिकल कॉलेज रायपुर











