छत्तीसगढ़ की पहली कबड्डी चैंपियन संजूदेवी , मजदूरी के आलम में हुई परवरिश, जाने उसके बारे में

छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय महिला टीम ने कबड्डी वर्ल्ड कप जीता। खास बात यह है कि प्रदेश के 25 वर्ष के इतिहास में यह पहला अवसर रहा जब राज्य के किसी भी कबड्डी खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। मार्च 2025 में ही संजू देवी ने ईरान में आयोजित 6वीं महिला एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया और कबड्डी वर्ल्डकप के लिए क्वालीफाई किया।
संजू ने बता दिए थे मंसूबे
बिलासपुर में संचालित बालिका आवासीय कबड्डी अकादमी की संजू देवी ने वर्ल्डकप के पहले मैच से ही अपने मंसूबे बता दिए थे कि न सिर्फ वह कबड्डी वर्ल्डकप हासिल करेंगी बल्कि इस पूरे टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगी, इसी का नतीजा रहा कि उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया।

शिक्षकों और कोच ने किया प्रेरित
बेहद गरीब परिवार से आने वाली 25 साल की संजूदेवी पहले गांव में छोटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया करती थी। उसके खेल को देखकर ही स्कूल के शिक्षकों और कोच ने उसे कोरबा के दर्री में स्पोर्ट्स क्लब में खेलने की शुरुआत कराई। बिलासपुर की कबड्डी अकेडमी में कोच दिल कुमार राठौर से ट्रेनिंग ली। इसके बाद मार्च में तेहरान में हुई 6वीं वुमन एशियन चैपियनशिप में संजू देवी ने गोल्ड मेडल जीता।
मजदूरी करके हो रहा गुजारा
संजूदेवी के माता-पिता ने मजदूरी करके अपने बच्चों की परवरिश की है। संजूदेवी ने 16 साल की उम्र से खेलना शुरू किया और उसके बाद फिर आगे बढ़ती ही गई। बेहद गरीब परिवार से आने वाली संजूदेवी को कई लोगों से खेल के लिए सहयोग भी मिला।

पढाई और खेल साथ-साथ
संजीदेवी कहती हैं कि खेल को मेरा पहला शौक है और अब अपने देश के लिए मेडल जीतना है वो कहती हैं कि बीते 5 साल से मेरे खेल में बहुत सुधार भी आया है मेरे कोच दिल कुमार राठौर का मुझे सहयोग मिला और उनके मार्गदर्शन में ही मैं खेल रही हूं।
अन्य राज्य में मिलता है सरकार का सहयोग
कोच दिलकुमार राठौर कहते है कि अन्य राज्यों में खिलाडियों को सरकार का पूरा सहयोग मिलता है वैसा ही सहयोग यहां पर भी खिलाडि़यों को मिलना चाहिए। हमारे राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं बस उन्हें सही माहौल और मार्गदर्शन मिलता है तो वो आगे बढ़ सकते है। प्रदेश में आदिवासी इलाकों में गरीबी के साए में कई बच्चे अपनी प्रतिभा को निखार रहे है। उन्हें सरकार का सहयोग मिलेगा तो वे प्रदेश का नाम रोशन कर सकते।











