UPSC Result: रायपुर की वैभवी को देशभर में 35वीं रैंक, बोलीं- ठान लें तो हर लक्ष्य हासिल कर सकती हैं..

टी. हुसैन. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर यूपीएससी में 35वीं रैंक हासिल करने वाली राजधानी की वैभवी अग्रवाल ने लड़कियों को आत्मविश्वास और मेहनत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर लड़कियां ठान लें तो कोई भी लक्ष्य उनके लिए असंभव नहीं है। बचपन में ही मां का साया उठ जाने के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। पिता के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने यह सफलता हासिल की। वैभवी का कहना है कि यूपीएससी केवल एक पद पाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए काम करने का एक बड़ा मंच है। उन्होंने युवाओं को समय का सही उपयोग करने और निराशा से दूर रहने की सलाह दी।

रिजल्ट आने से पहले और बाद में आपके जीवन में क्या बदला?
रिजल्ट आने के बाद मेरा सपना पूरा हो गया। मैं जो बनना चाहती थी, वह बन गई। अभी जिंदगी में बड़ा बदलाव नहीं आया, बस इतना है कि अब मुझे वही करने का मौका मिलेगा जो मैं हमेशा से करना चाहती थी।
हर सफलता के पीछे कठिन रातें होती हैं, आपकी संघर्ष भरी रातें कैसी रहीं?
मेरी तैयारी की यात्रा में हर स्टेज पर चुनौतियां आईं। मैंने हमेशा अपनी कमियों को पहचाना और उन पर काम किया। निराश होने के बजाए लगातार मेहनत करती रही।
आपको प्रेरणा कहां से मिली?
सबसे पहले मेरे पिता ने मुझे इस सेवा के बारे में बताया। बचपन से ही मेरी रुचि समाज सेवा की ओर रही, इसलिए मैंने यह मंच चुना।
आपकी इस यात्रा में परिवार का कितना योगदान रहा?
मेरी मां का निधन तब हो गया था जब मैं सिर्फ चार साल की थी। उसके बाद मेरे पिता ने ही मुझे संभाला और हमेशा हौसला दिया। पूरी तैयारी के दौरान उनका बहुत बड़ा सहयोग रहा।
क्या आप पद के रुतबे के लिए आई हैं या समाज सेवा के लिए?
मैं रुतबे के लिए नहीं आई हूं। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां से हम समाज और देश के लिए सीधे काम कर सकते हैं।
आजकल रील्स के दौर में युवाओं को क्या सलाह देंगी?
इंटरनेट और मोबाइल का उपयोग सीमित समय के लिए करना चाहिए। मनोरंजन जरूरी है, लेकिन ज्यादा समय उसमें बर्बाद नहीं करना चाहिए।
यह आपका तीसरा प्रयास था, पिछली गलतियों से क्या सीखा?
प्रीलिम्स और मेन्स दोनों में जहां-जहां कमी थी, उसे पहचाना और उस पर मेहनत की।
आपकी पढ़ाई की रणनीति क्या थी?
मुझे दिन में पढऩा ज्यादा सुविधाजनक लगता था, इसलिए सुबह से शाम तक पढ़ाई करती थी।
कलेक्टर बनने के बाद किस क्षेत्र में काम करना चाहेंगी?
जहां भी मेरी पोस्टिंग होगी, वहां मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगी। खास तौर पर महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं।
महिला दिवस पर लड़कियों को क्या संदेश देंगी?
लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। अगर हम ठान लें तो हर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। मैं इसका जीता-जागता उदाहरण हूं।
अगले 10 साल में देश में क्या बदलाव देखना चाहती हैं?
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें, शिक्षा बेहतर हो और महिला सशक्तीकरण मजबूत हो। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में यह बदलाव जरूर दिखाई देंगे।











