Nari Shakti: हिम्मत और मेहनत से गीता ने बदली किस्मत, टिकट एजेंट बनकर संभाला परिवार

Nari Shakti: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के चकरभाटा की रहने वाली गीता जोगी ने 20 साल पहले चकरभाटा रेलवे स्टेशन से अपने जीवन की दूसरी पारी शुरू की। पैसेंजर हॉल्ट एजेंट बनना गीता के लिए नए रास्ते बनाने वाला साबित हुआ। जब गीता ने काम शुरू किया था तो उस समय महिलाएं टिकट एजेंट कम बनती थीं। गीता ने अपने जीवन के 20 साल इसी काम को दिए और आज दोनों बच्चों को इस काबिल बनाया कि वे खुद अपना कार्य कर रहे हैं।

विपरीत परिस्थितियों में बिना घबराए आगे बढऩे की सीख देने वाली गीता कहती हैं कि मेरे दोनों बेटे मेरी हिम्मत बढ़ाते थे और मैं मेहनत से पीछे नहीं हटी। मेरा ऐसा मानना है कि आप जो भी काम करें, मन लगाकर करें, क्योंकि जब आप मेहनत पर विश्वास करते हैं, तो सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
पति के साथ करती थी बीमा का कार्य
गीता जोगी बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें रेलवे टिकट एजेंट बनने का कोई अनुभव नहीं था। वे पहले अपने पति के साथ मिलकर बीमा एजेंट का काम करती थीं और उसी से घर का खर्च चलता था। लेकिन पति के निधन के बाद जीवन अचानक मुश्किल हो गया। परिवार की जिम्मेदारी और बच्चों की परवरिश की चिंता उनके सामने खड़ी थी। ऐसे समय में उन्होंने हार मानने के बजाय हिम्मत से काम लिया।
एक दिन अखबार में चकरभाटा पैसेंजर हॉल्ट एजेंट के लिए निकला विज्ञापन उनकी नजर में आया। गीता कहती हैं कि उस समय उन्हें इस काम की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने सोचा कि जीवन चलाने और बच्चों को संभालने के लिए कुछ न कुछ करना ही होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने आवेदन भर दिया और यही फैसला उनके जीवन की नई दिशा बन गया।
रात में करती थीं सिलाई का काम
गीता के लिए शुरुआत आसान नहीं थी। टिकट एजेंट के काम से मिलने वाला कमीशन बहुत कम था, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था। ऐसे में उन्होंने अतिरिक्त मेहनत करने का फैसला किया। दिन भर रेलवे स्टेशन पर टिकट बेचने के बाद रात में वे सिलाई का काम करती थीं। दिन-रात की इस मेहनत से ही उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और घर की जिम्मेदारियां निभाईं।











