Entrepreneurs Women गांव की महिलाओं ने बदली तकदीर खड़ा किया अपना प्रोडक्शन हाउस
गांव की महिलाओं ने लिखी सफलता की नई कहानी, खड़ा किया अपना प्रोडक्शन हाउस
रायपुर। जिस गांव की अधिकांश महिलाएं कभी घर और खेत की जिम्मेदारियों से बाहर नहीं निकल पाती थीं, आज उसी गांव की 350 से अधिक महिलाएं मिलकर अपना प्रोडक्शन हाउस चला रही हैं और देशभर में अपने उत्पादों की पहचान बना रही हैं। महज 100 रुपये की हिस्सेदारी से शुरू हुआ यह प्रयास अब ग्रामीण महिला उद्यमिता का एक सफल मॉडल बन चुका है।
टेकरी गांव की महिलाओं ने गिरिजा बंजारे के नेतृत्व में संगठित होकर सत्य साईं महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित का गठन किया। दो साल पहले तक महिलाएं पापड़, बड़ी, अचार और अन्य घरेलू उत्पाद अपने स्तर पर बनाती थीं, लेकिन बाजार तक पहुंच नहीं होने से उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पाता था। इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए महिलाओं ने सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया।
शुरुआत में प्रत्येक महिला ने 100 रुपये का अंशदान दिया और अपनी पूंजी तैयार की। इसके बाद सरकारी योजनाओं के सहयोग से उत्पादन और विपणन गतिविधियों का विस्तार हुआ। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास आज एक संगठित महिला प्रोडक्शन हाउस में बदल चुका है, जहां महिलाएं उत्पादन के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का काम भी स्वयं कर रही हैं।
गिरिजा बंजारे कहती हैं कि सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं के आत्मविश्वास में आया है। जो महिलाएं पहले गांव से बाहर तक नहीं गई थीं, वे आज विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनियों में भाग ले रही हैं, प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाश रही हैं। समूह की कई महिलाएं, जिन्हें पहले पढ़ना-लिखना भी नहीं आता था, अब ग्राहकों से संवाद करने, ऑर्डर संभालने और बिक्री प्रबंधन का काम कर रही हैं।
महिला प्रोडक्शन हाउस में वर्तमान में मल्टीग्रेन आटा, अलसी माउथ फ्रेशनर, हल्दी और जिमीकंद का अचार, मल्टीग्रेन कॉन्संट्रेट, सुगंधित कैंडल, फिनायल, पापड़, बड़ी और ऑर्गेनिक साबुन जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग अब छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है।
यह कहानी केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की नहीं, बल्कि उस सामाजिक बदलाव की भी है जिसने ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान, नया आत्मविश्वास और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। टेकरी गांव की यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाएं एकजुट होती हैं, तो वे न केवल अपनी किस्मत बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की नई दिशा भी तय करती हैं।












