टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली मीराबाई चानू बोलीं- गलतियों से सीख कर आगे बढ़ना ही जिंदगी का बड़ा सबक है

अहमदाबाद. टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारत की स्टार महिला भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने युवा खिलाड़ियों को गुरु मंत्र दिया है कि अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना ही खिलाड़ी की जिंदगी का सबसे बड़ा सबक होता है। चानू ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा, कॅरियर में उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं, लेकिन यह हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है ना पूरी जिंदगी। इसलिए बिना किसी दबाव और तनाव के हमें अपने खेल को आगे बढ़ाना चाहिए। गौरतलब है कि चानू ने एक साल बाद वापसी करते हुए यहां आयोजित राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में 48 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। पेश है मीराबाई चानू से बातचीत के अंश…
टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था चानू ने
मेरे साथ ऐसा कई बार हो चुका है। आपने देखा होगा कि पेरिस ओलंपिक 2024 में मैं चौथे स्थान पर रही थी। लेकिन मैं दुखी नहीं हुई। अगर हम ऐसे मोड़ पर हतोत्साहित हो जाएं तो हमारा कॅरियर वहीं खत्म हो जाएगा। प्रत्येक खिलाड़ी को मंथन करना चाहिए कि आखिरी गलती कहां हुईं। हमें उन गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। एक खिलाड़ी के जीवन में हर दिन अच्छा नहीं होता। हमें बस ये सोचना चाहिए कि हम और कितना अच्छा कर सकते हैं। लगातार कड़ी मेहनत के दम पर हम हर मुकाम हासिल कर सकते हैं।
इस चैंपियनशिप के बाद अब आपका लक्ष्य क्या है?
खेल कोई भी हो, हर खिलाड़ी को बस इंजुरी से खुद को बचाना चाहिए। इंजुरी हर खेल में होती है। यह खेल का हिस्सा है। इसलिए हर खिलाड़ी को मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए और इंजुरी से उबरकर नई शुरुआत करनी चाहिए। कई खिलाड़ी इंजुरी होने से एकदम टूट जाते हैं। चोट लगती रहती है, बस मेहनत करने से नहीं चूकना चाहिए। हमें रिकवरी के लिए खुद पर भरोसा रखना चाहिए। कभी हार ना मानने का जज्बा ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
फिलहाल मेरा लक्ष्य अगले साल होने वाले एशियाई खेलों में पदक जीतना है क्योंकि मैंने अभी तक इस टूर्नामेंट में कोई पदक नहीं जीता है। पिछले एशियाई खेलों में मैं चोट के कारण हिस्सा नहीं ले पाई थी। इसलिए मेरा सारा फोकस एशियन गेम्स 2026 पर है। इसके बाद मैं सोचूंगी कि 2028 ओलंपिक व अन्य टूर्नामेंटों की तैयारी किस तरह से की जाए।
राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू।
भारतीय खेलों के लिए यह बड़ा अवसर है 2010 के बाद दूसरा मौका होगा जब भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर सकता है। साथ ही ओलंपिक जैसे इवेंट का हमारे देश में होना विश्व स्तर पर हमारे दबदबे को और मजबूत करेगा। मैं चाहती हूं कि ओलंपिक भारत में हो और हमारे खिलाड़ी पदकतालिका में शीर्ष-3 देशों में जगह बनाए।











