Nari Shakti: समर्पण से बदला स्कूल और बच्चों का भविष्य.. गांव में जलाया शिक्षा का दीपक

Nari Shakti: शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, यह जीवन बदलने का जरिया है। इस सोच को आत्मसात कर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की संगीता मौर्या ने शिक्षण कार्य शुरू किया। उन्होंने उस स्कूल को नई पहचान दी, जहां कभी बच्चे आना ही नहीं चाहते थे। संघर्षों से भरी राह में उन्होंने न सिर्फ बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा, बल्कि पूरे गांव को यह विश्वास दिलाया कि शिक्षा ही भविष्य का सशक्त आधार है। जब 12 साल पहले वह जिले की स्कूल में आई तो यहां स्थिति बेहद निराशाजनक थी।
संगीता की मेहनत से स्कूल का माहौल व दशा पूरी तरह बदल गई। जहां कभी सन्नाटा छाया रहता था, वहीं अब बच्चों की हंसी और सीखने का उत्साह गूंजता है।

गीतों का सहारा लिया
वह बताती हैं कि नामांकन बढ़ाने के बाद चुनौती बच्चों को पढ़ाई से जोड़कर रखने की थी। उन्होंने परंपरागत तरीके से पढ़ाई के बजाय कहानियां, खेल और गीतों का सहारा लिया। उन्होंने रोल-प्ले, नाटक और लोककथाओं के जरिए बच्चों में आत्मविश्वास जगाया।
लोगों के घर तक गईं
वह बताती हैं कि यहां 130 नामांकन होने के बावजूद सिर्फ 30 बच्चे रोज आते थे। जर्जर बेंच, उदासीन माहौल के बीच खेतों और घर के कामों में उलझे बच्चों को कक्षा में लाना आसान नहीं था। उन्होंने हार मानने के बजाय हर घर का दरवाजा खटखटाया। माता-पिता से बातचीत कर उन्हें समझाया कि बच्चों को पढ़ाना क्यों जरूरी है। पढ़ाई का महत्त्व समझाने के लिए उन्होंने नुक्कड़ नाटक कराएं। कुछ ही समय में उपस्थिति 30 से बढ़कर 100 तक पहुंच गई।











