Nari Shakti: फिटनेस की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, उम्र है बस एक नंबर

मुंबई. लोग कहते हैं कि 60 के बाद आराम करना चाहिए, लेकिन मैंने तो 60 के बाद अपनी असली जिंदगी शुरू की। मेरा नाम है पुष्पा भट्ट, उम्र 6८ साल और मैं एक मैराथन रनर हूं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन लोग मुझे फिटनेस गोल्स की मिसाल मानेंगे। लेकिन सच कहूं, तो मेरी शुरुआत एक समस्या से हुई थी, तनाव और सेहत बिगड़ने से। कॉर्पोरेट जॉब की व्यस्तता, सिंगल मदर की जिम्मेदारियां और बैठे-बैठे रहने की आदत ने मेरी सेहत पर बुरा असर डाला।
पीठ और घुटनों में दर्द रहने लगा। तब मैंने तय किया कि मुझे अपनी बेटी के लिए मजबूत रहना है, तो खुद को बदलना होगा। मुझे याद है, मुंबई मैराथन की 7 किलोमीटर वाली ड्रीम रन के बारे में सुना तो लगा आसान होगा। पर 15 मिनट दौड़ने के बाद ही सांसें फूलने लगीं। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि मैराथन मजाक नहीं है। हार मानने के बजाय मैंने रोज दौड़ना शुरू किया। स्टैमिना बढ़ा और 47 की उम्र में पहली बार एक घंटे दौड़ सकी। उस पल जो खुशी मिली, उसने मेरी जिंदगी बदल दी।

अपने लिए निकालें समय
मैं हफ्ते में करीब 17-20 घंटे ट्रेनिंग करती हूं। नींद का ध्यान रखती हूं, सुबह की धूप जरूर लेती हूं, दिन की शुरुआत गर्म पानी से करती हूं। मेरा मानना है कि सीनियर सिटीजंस को वर्कआउट भी करना चाहिए। जंक फूड से दूरी, घर का बना खाना और ‘मी टाइम’ मेरी दिनचर्या का हिस्सा हैं।
60 की उम्र में शुरू किया साइकिल चलाना
46 साल में जिम शुरू किया, 60 साल में साइकिल चलाना सीखा। लोग पूछते हैं कि इस उम्र में ये सब क्यों? मेरा जवाब है—फिटनेस की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। वर्ष 2019 का खारदुंग ला हाई एल्टीट्यूड मैराथन मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था। 72 किलोमीटर की इस रेस में मैं चार मिनट से चूकी, लेकिन अगले साल मैंने वही रेस चार मिनट पहले पूरी की और अपनी एज कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। लेह के बाजार में जब लोग मेरा नाम चिल्ला रहे थे, तब लगा कि मेरी मेहनत रंग लाई।











