तीखी धूप के बीच तेज बारिश ने बिगाड़ दी बच्चों की सेहत, सुस्त हो या खाना न खाए तो हो जाएं अलर्ट

रायपुर. तीखी धूप के बीच तेज बारिश ने बच्चों की सेहत बिगाड़ दी है। इन दिनों हाई ग्रेड फीवर, जिसमें बुखार 104 फारेनहाइट तक जा रहा है। इससे पैरेंट्स की चिंता बढ़ गई है। एम्स, आंबेडकर व जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे 600 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के बुखार का सीजन जल्द खत्म नहीं होने वाला है, बल्कि अक्टूबर तक यही स्थिति बनी रहेगी।
इन दिनों तेज बुखार और उससे जुड़ी समस्याओं के साथ बच्चे विभिन्न अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इसका कारण वायरल इंफेक्शन, फ्लू, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, एएफएन (एक्यूट फेबरिल न्यूट्रोपेनिया), एचएफएमडी (हैंड फुट एंड माउथ डिजीज) और इंफ्लूएंजा लाइक इलनेस है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस मौसम में सबसे कमजोर होती है। टाइफाइड, डेंगू व मलेरिया का भी जोखिम रहता है। हालांकि रायपुर में डेंगू व मलेरिया के मामले गिनती के हैं। इस समय वायरल फीवर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसमें बुखार अचानक 104-105 फारेनहाइट तक पहुंच जाता है और तीन से पांच दिन तक बना रहता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
एक-दो दिन में बुखार उतर जाए तो मौसमी
दवा देने के बाद कम से कम एक घंटा बच्चे के साथ रहें और बुखार पूरी तरह उतरने के बाद ही उसे सामान्य गतिविधि करने दें। अगर 1-2 दिन में बच्चा ठीक हो जाए तो यह मौसमी बुखार है, घबराने की जरूरत नहीं। ऐसे में बच्चे को हल्के कपड़े पहनाएं। धीरे-धीरे घूंट-घूंट पानी पिलाएं। इस मौसम में ठेले व खोमचों में बिकने वाली चीजें न खिलाएं। बासी खाने से सेहत खराब होती है। इसलिए घर में बने ताजा खाना खिलाएं।
अगर बच्चा सिर दर्द, चक्कर, उल्टी, पेट दर्द, ठंड लगना, सुस्ती या खेलना-खाना बंद कर दे तो तुरंत बुखार चेक करें। 4 साल से कम उम्र के बच्चों में थर्मामीटर से सही तापमान मापना मुश्किल होता है, इसलिए लक्षणों को प्राथमिकता दें। 4 साल से बड़े बच्चों में डिजिटल थर्मामीटर को जीभ के नीचे 2-3 मिनट रखकर तापमान नापें।
अगर दो दिन तक बुखार लगातार बना रहे या बुखार उतरने के बावजूद बच्चा सुस्त रहे, खाना-पानी न ले, पेशाब कम हो या बार-बार उल्टी हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इस उम्र में तेज बुखार बच्चों को दौरे (फिट्स) तक दे सकता है। थर्मामीटर पर निर्भर रहने के बजाय लक्षणों को पहचानें और तुरंत अस्पताल ले जाएं।
इस सीजन में 4 साल से कम या इससे ज्यादा उम्र वाले बच्चे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। हाई ग्रेड फीवर आने पर खुद से दवा देने के बजाय डॉक्टरों को दिखाएं। बच्चा सिर दर्द, चक्कर, उल्टी, पेट दर्द, ठंड लगना, सुस्ती या खेलना-खाना बंद कर दे तो अलर्ट हो जाएं। कुछ मामलों में बच्चे को झटके भी आ सकते हैं।
- डॉ. ओंकार खंडवाल, एचओडी पीडियाट्रिक्स, आंबेडकर अस्पताल











