कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण को मिली मंजूरी, वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बड़ी जानकारी
साय सरकार ने कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण के प्रस्ताव पर स्वीकृति मिली है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इसकी जानकारी दी। कहा कि सीधे बस्तर कनेक्टिविटी के लिए यह सरकार का बड़ा प्रयास है..

बस्तर से सीधी कनेक्टिविटी के लिए साय सरकार ने कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण के प्रस्ताव पर स्वीकृति मिली है। मंत्री केदार कश्यप ने आज इसकी जानकारी दी। कहा कि बस्तर के समग्र विकास में बेहतर सड़क संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। कांगेर घाटी क्षेत्र में NH-30 के इस महत्वपूर्ण हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की प्रक्रिया को सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय प्रावधानों का पालन करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है।
जगदलपुर–सुकमा–कोंटा मार्ग के होगा चौड़ीकरण
जगदलपुर–सुकमा–कोंटा मार्ग के अंतर्गत NH-30 (पुराना NH-221) के किलोमीटर 25.530 से 31.540 तक के हिस्से के उन्नयन के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग का प्रस्ताव है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से परियोजना को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अब प्रथम चरण में निर्धारित शर्तों के अनुपालन के पश्चात द्वितीय चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।
यह मार्ग बस्तर के दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जगदलपुर से सुकमा एवं कोंटा की ओर आवागमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
क्षतिपूरक वनीकरण की राशि जमा, परियोजना की तैयारियों को भी मिलेगी गति
परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के उपयोग के बदले निर्धारित क्षतिपूरक वनीकरण एवं अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 की निर्धारित दर के अनुसार जमा की जा चुकी है। अंतिम स्वीकृति तक निर्धारित राशि में किसी प्रकार का अंतर आने की स्थिति में उसे प्रचलित दरों के अनुसार जमा किए जाने का प्रावधान भी किया गया है।
भारत सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार अंतिम स्वीकृति से पहले परियोजना एजेंसी आवश्यक संसाधन जुटाने तथा अनुमत प्रारंभिक कार्यों को आगे बढ़ा सकेगी। हालांकि ब्लैक टॉपिंग सहित परियोजना को स्थायी अथवा पूर्ण स्वरूप देने वाले कार्य अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किए जा सकेंगे। इससे द्वितीय चरण की स्वीकृति मिलने तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने और अंतिम मंजूरी के बाद निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
बस्तर में विकास भी, पर्यावरण का संरक्षण भी
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे ध्यान में रखते हुए सड़क परियोजना में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन विकास की इस प्रक्रिया में क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता के संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता न हो। NH-30 की यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।
बेहतर सड़क से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को भी मिलेगा लाभ
NH-30 जगदलपुर को सुकमा और कोंटा की दिशा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है। संबंधित 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सड़क संपर्क बेहतर होने से प्रशासनिक पहुंच को मजबूती मिलने के साथ ही पर्यटन एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर परिस्थितियां निर्मित होंगी। विशेष रूप से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को प्रमुख शहरी केंद्रों से जोड़ने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बस्तर की कनेक्टिविटी को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता : केदार कश्यप*
उन्होंने कहा, प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में “हमारा प्रयास है कि बस्तर में विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं अनावश्यक विलंब के बिना आगे बढ़े। केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है। NH-30 के इस हिस्से का उन्नयन होने से क्षेत्र के नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी।











