Nari Shakti: हर लड़की को सपने पूरा करने का हक… निशिता राजपूत

वड़ोदरा। मैं जब छोटी थी, तो मुझे अनाथालयों में जन्मदिन मनाने के लिए भेजा जाता था। वहां बच्चों से मिलकर यह समझ में आया कि शिक्षा उनके जीवन को बदल सकती है। मुझे एहसास हुआ कि लड़कियों को शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे अपने जीवन को बेहतर बना सकें। जब मैं 2011 में इस मिशन पर निकली, तो मेरे पास कोई बड़ा संगठन या टीम नहीं थी। हम दानकर्ताओं से 1,000 रुपए के चेक प्राप्त करते और उन चेकों को स्कूलों में योग्य लड़कियों की फीस के रूप में दे देते। मेरा यह काम साल दर साल बढ़ता चला गया।
पैसा दूसरों की मदद के लिए भी
मैंने समाज कार्य में डिग्री प्राप्त की और श्रमिक अध्ययन (कानून) में डिप्लोमा किया। विवि की बास्केटबॉल टीम की सदस्य भी रही। जिस तरह से मेरा पालन-पोषण हुआ कि उसने अनाथों, लड़कियों के प्रति एक संवेदनशीलता विकसित की। पिता ने सिखाया कि पैसा सिर्फ खुद के लिए नहीं, दूसरों की मदद के लिए भी है।

मेरा काम पूरी तरह से पारदर्शी है। जब भी किसी दानदाता से पैसा मिलता है, तो मैं उन्हें पूरी जानकारी देती हूं कि उनका दान किस लड़की की फीस के लिए खर्च हो रहा है। मैं बुजुर्गों की भी मदद करती हूं। उनके लिए पैक्ड खाना भेजती हूं। साथ ही, उन महिलाओं को रोजगार देती हूं जो ये खाना वितरित करती हैं। मैं यही चाहती हूं कि लोग समझें कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण की कुंजी है। हर लड़की का हक है कि वह अपने सपनों को पूरा कर सके और मैं उनके सपनों को साकार करने में मदद करने के लिए हमेशा यहां हूं। इसमें मेरा परिवार मेरे साथ है।
शुरू करना है स्कूल: मैं चाहती हूं कि एक दिन मैं ऐसा स्कूल स्थापित कर सकूं, जिसमें गरीब बच्चों को मुत शिक्षा मिले। मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह है कि मैंने उन लड़कियों के लिए कुछ किया है जिनके पास कोई और रास्ता नहीं था। जब मैं यह देखती हूं कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, तो मुझे लगता है कि मेरा काम सफल हो रहा है।











