Nari Shakti: पच्चीस साल के छत्तीसगढ़ की पहली कबड्डी चैंपियन संजूदेवी, जानिए उनका संघर्ष

सरिता दुबे. रायपुर. कोरबा के पाकपाली ब्लॉक के केराकछार गांव की रहने वाली 23 साल की संजूदेवी छत्तीसगढ़ की पहली कबड्डी खिलाड़ी हैं, जिनका चयन भारतीय कबड्डी टीम में हुआ। अभी वे बांग्लादेश के ढाका में हो रहे सेकंड वर्ल्ड कप में खेल रही हैं। बेहद गरीब परिवार से आने वाली संजूदेवी पहले गांव में छोटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया करती थी। उनके खेल को देखकर ही स्कूल के शिक्षकों और कोच ने उसे कोरबा के दर्री में स्पोर्ट्स क्लब में खेलने की शुरुआत कराई। बिलासपुर की कबड्डी एकेडमी में कोच दिल कुमार राठौर से ट्रेनिंग ले रही संज्रूदेवी ने मार्च में तेहरान में हुई छठवीं वुमन एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था।
पढ़ाई और खेल साथ-साथ
संजूदेवी कहती हैं कि खेल मेरा पहला शौक है और अब देश के लिए मेडल जीतना है। वह कहती हैं कि बीते 5 साल से मेरे खेल में बहुत सुधार भी आया है। मेरे कोच दिल कुमार राठौर का मुझे सहयोग मिला और उनके मार्गदर्शन में ही मैं खेल रही हूं।
सरकार का सहयोग जरूरी
कोच दिलकुमार राठौर कहते हैं कि 25 साल में पहली बार हमारे प्रदेश को कबड्डी की नेशनल प्लेयर मिली है। सरकार का सहयोग इस गरीब बच्ची को मिलना चाहिए, जिससे गरीब परिवारों की प्रतिभाएं सामने आ सकेंगी। बीते 4 साल में हमने कई सारे खिलाड़ी तैयार किए और अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी से खेलो इंडिया में कई बच्चों ने क्वालिफाई किया हैं।
शुरुआत में जब संजूदेवी एकेडमी आई, तब वह बेसिक तो अच्छा खेलती थी। बस हमने उसे खेल की कुछ बारीकियां सिखाई।
मजदूरी करके हो रहा गुजारा संजूदेवी के माता-पिता ने मजदूरी करके अपने बच्चों की परवरिश की है। संजूदेवी ने 16 साल की उम्र से खेलना शुरू किया और उसके बाद फिर आगे बढ़ती ही गई। बेहद गरीब परिवार से आने वाली संजूदेवी को कई लोगों से खेल के लिए सहयोग भी मिला।











