Nari shakti: महिलाओं को आत्मनिर्भर और लड़कियों को साक्षर बनाकर बदली गांव की तस्वीर

सरिता दुबे. समाजसेविका साधना दुग्गड़ कहती हैं कि महिलाओं और लड़कियों को साक्षर कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमने कुछ महिलाओं को जोड़कर काम करना शुरू किया। शुरुआत में थोड़ी परेशानी आई लेकिन कुछ सालों बाद ही हमारा कारवां बढ़ता चला गया। रायपुर निवासी साधना ने बताया कि 5 लोगों से शुरू हुआ ग्रुप 29 लोगों तक पहुंच गया। साल 2013 में शुरू हुए अर्पण ग्रुप ने 12 सालों में 10 गांवों की सैकड़ों महिलाओं को सिलाई सिखाई और कई लड़कियों के स्कूल-कॉलेज की फीस भरकर उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ा।
उनका मानना है कि हर महिला को उनके लिए बनाए कानून की जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि आज भी पढ़ी-लिखी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। हम ग्रामीण अंचलों में जाकर काम करते हैं, महिलाओं से मिलते हैं तो हमारे सामने बहुत से मामले घरेलू हिंसा के ही आते हैं। साल 2013 में मैंने अपना पूरा समय महिलाओं के लिए अर्पित कर दिया और इस कारण ही मैंने अपने इन कार्यों को अर्पण सेवा समिति का नाम दिया।

इस बार 60 बच्चों की फीस भरी
साधना दुग्गड़ कहती हैं कि हमने शुरू से ही सेवा भाव के काम किए। उसी दिशा में आगे बढ़ते रहे। अभनपुर और आरंग के कई गांवों में आज लोग अर्पण सेवा समिति को जानने लगे हैं। अभनपुर के पास के गांव सातपारा, बेलभाटा, नायक, बांधा, झांकी, केंद्री की महिलाओं और लड़कियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया। हमने इसी साल 60 बच्चियों की फीस भरी है। गांवों में कक्षा 10वीं- 12वीं के बाद लड़कियों की पढ़ाई छुड़ा दी जाती है। उन्हें घर के काम में लगा दिया जाता है। इस कारण ही हमने इन लड़कियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के लिए इनके स्कूल-कॉलेज की फीस भरी।
हर माह जमा करते हैं राशि
अर्पण महिला मंडल में 29 महिलाएं हैं। हम हर माह खुद के खर्चों में से कुछ रुपए बचाकर राशि जमा करते हैं। इस जमा राशि में हम ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को रोजगार से जोड़ते हैं, उनको रोजगार दिलाने के लिए शिक्षित करते हैं। महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करते हैं। उनकी समस्याएं जानकर उसे दूर करके उन्हें उस लायक बना देते हैं कि वे आगे से हर परेशानी का सामना कर सके।
आंगनबाड़ियों में दिया शिशु आहार
अर्पण सेवा समिति ने साल 2017 से 2020 तक रायपुर संभाग के 100 आंगनबाड़ी केंद्रों में एक हजार किलो अर्पण शिशु आहार दिया। इस साल भी हमने 100 किलो शिशु आहार शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे। हमने आज तक सरकारी मदद नहीं ली। अब लोग हमारे सेवा कार्यों को देखकर हमसे जुड़ रहे हैं। समाज के लोग भी आर्थिक मदद देते हैं।











