Nari Shakti: आयुर्वेद ने सुधारी जीवनशैली, ओपीडी में रोज आ रहीं 50 महिलाएं

सरिता दुबे रायपुर.  आज के समय में बदली हुई जीवनशैली ने एक ओर जहां कई बीमारियां दी हैं, वहीं इसी बदली हुई जीवनशैली को आयुर्वेद के जरिए सुधार कर महिलाओं की बहुत सी बीमारियां दूर हो रही हैं। बीते कुछ सालों में प्रदेश में गर्भवती महिलाओं ने आयुर्वेद को अपनाकर नार्मल तरीके से बच्चों को जन्म दिया है। पहले जिन रोगों के लिए महिलाएं एलोपैथी का सहारा लेती थीं, वहीं अब महिलाएं आयुर्वेद को अपनाकर स्वस्थ जीवन जी रही हैं। अब महिलाओं पीसीओडी, हार्मोनल डिसबैलेंस, इनफर्टिलिटी, मेंटल स्ट्रेस की समस्याओं के समाधान के लिए महिलाएं आयुर्वेद का सहारा ले रही हैं। इनफर्टिलिटी के लिए भी आयुर्वेद में ऐसी दवाएं मौजूद हैं, जो शुक्राणु और अंडाणु को बढ़ाती हैं। आईवीएफ के फेल केस भी अब आयुर्वेद में ठीक हो रहे हैं।

रायपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रशेखर घाटगे बीते 14 साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. घाटगे बताते हैं कि अब लोगों का खासकर महिलाओं का आयुर्वेद पर विश्वास इस कदर बढ़ा है कि आज से 10 साल पहले ओपीडी में महिलाओं की संख्या 4 से 5 हुआ करती थी, वहीं अब रोजाना 30 से 40 महिलाएं ओपीडी में आ रही हैं।

नार्मल डिलीवरी हो रही

डॉ. घाटगे ने बताया की बीते कुछ सालों से सिजेरियन डिलीवरी कम हो रही है। जिन महिलाओं ने आयुर्वेद को अपनाया उनकी डिलीवरी नार्मल हो रही है। महिलाओं का विश्वास आयुर्वेद में बढ़ा है। ओपीडी में महिलाएं कई तरह के उपचार के लिए आती हैं और इनमें सभी रोग ठीक भी होते हैं। राष्ट्रीय आयुष मिशन के गर्भवती महिलाओं के लिए सुप्रजा कार्यक्रम चलाया जाता है। इसमें गर्भ संस्कार भी कराए जाते हैं।

इन रोगों के लिए आ रहीं

ल्यूकोरिया, मासिक धर्म विकार, पीसीओडी, पेरिमेनोपॉज़ल सिंड्रोम, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, डायस्मेनोरिया ,बांझपन के मामले, एएनसी, पीआईडी ,भारी मासिक धर्म के मामले, प्रोलैप्स के मामले आते हैं और महिलाओं को इसमें राहत भी मिली है। इस कारण ही अब रोजाना ओपीडी में महिलाओं की संख्या बढ़़ रही है।

SARITA DUBEY

बीते 24 सालों से पत्रकारिता से जुड़ी है इस दौरान कई बडे अखबार में काम किया और अभी वर्तमान में पत्रिका समाचार पत्र रायपुर में अपनी सेवाए दे रही हैं। महिलाओं के मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही है।
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